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हाथरस 13 अक्टूबर । अलीगढ़-आगरा बाईपास स्थित बांके बिहारी एन्क्लेव में मां कात्यायनी देवी का नव्य एवं भव्य मंदिर बनकर तैयार हो गया है। मां कात्यायनी देवी के इस भव्य मंदिर में 16 अक्टूबर को विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्राण प्रतिष्ठा संपन्न होगी। इसके साथ ही मां कात्यायनी अपने नवनिर्मित भव्य एवं अलौकिक भवन में विराजमान होंगी। इस ऐतिहासिक एवं धार्मिक अवसर को लेकर क्षेत्र में श्रद्धा, उत्साह और उल्लास का वातावरण बना हुआ है। शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिवस से ही मंदिर परिसर में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ हो चुका है, जो पूरे नवरात्रि तक निरंतर जारी रहेगा। सम्पूर्ण मन्दिर परिसर को फूलों एवँ रंग बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। मंदिर में मां के दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया है। मंदिर परिसर में संत-महात्माओं का आगमन भी हो रहा है। वैदिक मंत्रों की गूंज, यज्ञ वेदी में दी जा रही आहुतियां और मां के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। चारों ओर ‘जय माता दी’ के जयघोष सुनाई दे रहे हैं। मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्रतिदिन हो रहे धार्मिक अनुष्ठान

शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन से ही मंदिर परिसर में विधि-विधान के साथ प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अनुष्ठान शुरू हो गए हैं। महामंडलेश्वर रुद्रदेवानंद जी महाराज के सानिध्य में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराए जा रहे हैं। नवरात्रि के प्रत्येक दिवस मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, यज्ञ एवं अन्य धार्मिक क्रियाएं आयोजित की जा रही हैं। यज्ञ वेदी में श्रद्धालुओं की ओर से आहुतियां अर्पित की जा रही हैं तथा मां कात्यायनी से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की जा रही है। महोत्सव के दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण बना हुआ है। श्रद्धालु मां के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए पूजा-अर्चना में भाग ले रहे हैं। नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी देवी की विशेष पूजा-अर्चना के साथ उन्हें उनके नवनिर्मित भव्य मंदिर में विराजमान कराया जाएगा। 16 अक्टूबर को होने वाली प्राण प्रतिष्ठा को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां पूरी की जा रही हैं। भक्तों के लिए यह अवसर विशेष धार्मिक महत्व रखता है, क्योंकि वर्षों से जिस स्थान पर मां की पूजा-अर्चना होती आ रही है, उसी स्थान पर अब मां का भव्य मंदिर आकार ले चुका है।

करीब 200 वर्ष पुराना है मां कात्यायनी की प्रकट स्थली का इतिहास

मंदिर के चरण सेवक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला गौसेवा प्रमुख देवेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि मां कात्यायनी देवी के भव्य मंदिर का निर्माण कराना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि गांववासियों और अपने बुजुर्गों से मिली प्रेरणा के फलस्वरूप मां कात्यायनी देवी के लिए इस नव्य एवं भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया है। इस मंदिर से क्षेत्र के लोगों की गहरी आस्था और धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं।देवेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि जिस स्थान पर आज मां कात्यायनी देवी का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, उसी स्थान पर लगभग 200 वर्ष पूर्व मां खेत में प्रकट हुई थीं। उस समय यहां खेत में एक दीवारनुमा छोटा मंदिर हुआ करता था। ग्रामीण उसी स्थान पर मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना करते थे। समय बीतने के साथ मां के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ती गई और जोगिया गांव सहित आसपास के क्षेत्रों तथा दूर-दराज के स्थानों से भी भक्त यहां दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए आने लगे। उन्होंने बताया कि वर्षों से श्रद्धालु इस पवित्र स्थान पर मां कात्यायनी की आराधना करते आ रहे हैं। ग्रामीणों और बुजुर्गों की आस्था, प्रेरणा एवं मां के प्रति समर्पण की भावना ने भव्य मंदिर निर्माण की प्रेरणा दी। अब मां कात्यायनी देवी अपने नवनिर्मित दिव्य एवं भव्य भवन में विराजमान होंगी, जिससे श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए बेहतर धार्मिक स्थल प्राप्त होगा।

आस्था, परंपरा और भव्यता का संगम बनेगा मंदिर

मां कात्यायनी देवी के मंदिर का निर्माण क्षेत्र की धार्मिक परंपरा और जनआस्था की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। करीब दो शताब्दियों से पूजित इस स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के माध्यम से पुरानी धार्मिक परंपरा को नया स्वरूप मिल रहा है। नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित हो रहे अनुष्ठानों ने मंदिर परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया है। 16 अक्टूबर को मां कात्यायनी देवी की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही मंदिर में पूजा-अर्चना का नया अध्याय शुरू होगा। श्रद्धालु इस शुभ अवसर पर मां के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उत्सुक हैं। मंदिर परिसर में जारी धार्मिक अनुष्ठानों और मां के जयकारों के बीच पूरे क्षेत्र में भक्ति एवं श्रद्धा की लहर दिखाई दे रही है। मां कात्यायनी देवी का यह नव्य एवं भव्य मंदिर आने वाले समय में श्रद्धालुओं की आस्था, धार्मिक विश्वास और परंपरा का प्रमुख केंद्र बनेगा।

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