
हाथरस 12 अक्टूबर। जेटीआरआई लखनऊ के निर्देशानुसार तथा जनपद न्यायाधीश विनय कुमार-तृतीय की अध्यक्षता में जनपद न्यायालय परिसर स्थित वीडियो कॉन्फ्रेंस रूम में न्यायिक अधिकारियों के सतत सीखने और विधिक ज्ञान को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अपर जनपद न्यायाधीश विजय कुमार-द्वितीय ने भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम और हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी देते हुए वसीयत, संपत्ति के उत्तराधिकार, प्रोबेट और उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। अपर जनपद न्यायाधीश विजय कुमार-द्वितीय ने बताया कि भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम मुख्य रूप से ईसाई, पारसी और यहूदी समुदायों के उत्तराधिकार संबंधी मामलों को विनियमित करता है। वहीं, हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए वसीयत से संबंधित नियम भी इस अधिनियम के अंतर्गत आते हैं, जबकि बिना वसीयत के मृत्यु होने पर सामान्यतः हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के प्रावधान लागू होते हैं। मुस्लिम समुदाय के उत्तराधिकार संबंधी मामलों में उनके व्यक्तिगत कानून प्रभावी होते हैं। उन्होंने प्रोबेट को वसीयत की प्रामाणिकता प्रमाणित करने वाली न्यायालयीन प्रक्रिया बताते हुए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के महत्व पर भी प्रकाश डाला। इन प्रक्रियाओं के माध्यम से बैंक खातों और अन्य संपत्तियों से संबंधित दावों के निस्तारण तथा पात्र वारिसों को संपत्ति हस्तांतरित कराने में सहायता मिलती है। कार्यक्रम का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों को उत्तराधिकार कानूनों के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराना और न्यायिक कार्यों में विधिक समझ को और अधिक प्रभावी बनाना रहा। इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय विजय कुमार डुंगराकोटी, अपर जनपद न्यायाधीश संगीता शर्मा, हर्ष अग्रवाल, शैलेन्द्र सिंह, ईश्वर सिंह, बुशरा आदिल रिजवी, महेन्द्र कुमार रावत, प्रशान्त कुमार एवं जयहिन्द कुमार सिंह सहित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सूरज कुमार मिश्रा, सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) आकांक्षा गर्ग, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपकनाथ सरस्वती, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सादाबाद आकांक्षा तिवारी, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अनु चौधरी, सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग)/त्वरित न्यायालय ईशा अग्रवाल तथा अन्य न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।










