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हाथरस 12 सितम्बर। अपर सत्र न्यायाधीश (कक्ष संख्या-01), हाथरस की अदालत ने 13 साल पुराने चर्चित लूटकांड में सात अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने प्रत्येक अभियुक्त पर अलग-अलग धाराओं में जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी और अभियुक्तों द्वारा जेल में बिताई गई पूर्व अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। न्यायालय ने हरिओम पाराशर उर्फ कनैटा, महेश सिंह, केशव पहलवान, हरिकिशन, मनीष पुजारी उर्फ मनीष कुमार, टिल्लू उर्फ कृष्ण गोपाल और पिन्टू उर्फ विक्रम को धारा 395, 397 और 412 IPC के तहत दोषी माना। धारा 395 में प्रत्येक को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसी तरह धारा 397 IPC के तहत भी प्रत्येक अभियुक्त को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई। धारा 412 IPC के तहत प्रत्येक पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया और 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। न्यायालय ने आदेश दिया कि तीनों धाराओं में दी गई सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जेल में बिताई गई पूर्व अवधि को धारा 428 CrPC के तहत सजा में समायोजित किया जाएगा।

2012 में तमंचे के बल पर हुई थी 11.88 लाख की लूट

मामला नौ जुलाई 2012 का है। भरतपुर निवासी महेंद्र सिंह अपने साथी गोविंद के साथ हाथरस से 11 लाख 88 हजार रुपये की नकदी लेकर जा रहे थे। मुरसान कस्बे के फाटक के पास काले रंग की पल्सर बाइक पर सवार बदमाशों ने उनकी स्विफ्ट डिजायर कार को रोक लिया। बदमाशों ने तमंचे के बल पर कार की चाबी छीन ली और सात-आठ लोगों ने कार को घेर लिया। बदमाशों ने कार की डिग्गी में रखी नकदी से भरी अटैची के साथ मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड और मोबाइल भी लूट लिया। इसके बाद फायरिंग करते हुए मौके से फरार हो गए। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

मुठभेड़ के बाद हुई थी गिरफ्तारी

पुलिस ने 25 जुलाई 2012 को मुठभेड़ के बाद आरोपितों को लूटे गए माल और अवैध तमंचों के साथ गिरफ्तार किया था। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता गोविंद वशिष्ठ ने पैरवी की। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सत्र परीक्षण संख्या 115/2013 को लीडिंग केस मानते हुए न्यायालय ने सातों अभियुक्तों को दोषी करार दिया।

कोर्ट ने कहा—सहानुभूति के हकदार नहीं

फैसले में न्यायालय ने अभियुक्तों के कृत्य को अत्यंत जघन्य बताते हुए कहा कि इस तरह का अपराध सभ्य समाज में कानून के शासन की भावना के पूरी तरह विपरीत है। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे अपराध करने वाले व्यक्ति किसी भी प्रकार की सहानुभूति के हकदार नहीं हैं। न्यायालय के इस फैसले के बाद 13 साल पुराने चर्चित लूटकांड में दोषियों को सजा मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

सहायक शासकीय अधिवक्ता : गोविंद वशिष्ठ

 

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