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हाथरस 02 जुलाई । भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाथरस में जाली नोटों के प्रचलन को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आरबीआई के निर्गम विभाग, कानपुर द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हाथरस को भेजे गए पत्र के आधार पर पुलिस ने संबंधित मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, आरबीआई के निर्गम विभाग, कानपुर के प्रबंधक (दावा अनुभाग) प्रणीत पिंजर्ला द्वारा 10 जनवरी 2023 को जारी पत्र में बताया गया था कि विभिन्न बैंकों की करंसी चेस्ट शाखाओं से प्राप्त प्रेषण में बड़ी संख्या में जाली नोट मिल रहे हैं। पत्र में उल्लेख किया गया कि जाली नोटों का मुद्रण, वितरण और प्रचलन भारतीय दंड संहिता की तत्कालीन धारा 489ए से 489ई (अब संबंधित प्रावधान भारतीय न्याय संहिता एवं अन्य लागू कानूनों के अनुसार) के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। पत्र के अनुसार, दिसंबर 2022 में भारतीय स्टेट बैंक के मुद्रा प्रकोष्ठ, हाथरस की करंसी चेस्ट से आरबीआई को भेजे गए प्रेषण में भी जाली नोट पाए गए थे। इन नोटों का विवरण राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के पोर्टल पर यूनिक रेफरेंस नंबर RBI 3165320115142022 के साथ अपलोड किया गया था।

आरबीआई ने अपने पत्र में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से अनुरोध किया था कि संबंधित थाना क्षेत्र का निर्धारण कर जाली नोटों के मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए। साथ ही यह भी बताया गया कि संबंधित बैंक शाखाओं का थाना क्षेत्र निर्धारित करने में आरबीआई को कठिनाई होती है, इसलिए पुलिस से सीधे सहयोग का अनुरोध किया गया। बताया गया कि उक्त पत्र के क्रम में 30 जून 2026 को कोतवाली प्रभारी सतेंद्र सिंह राघव को शिकायत प्राप्त हुई, जिसके आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जाली नोटों के स्रोत और उनसे जुड़े व्यक्तियों की पहचान के लिए जांच की जा रही है।

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