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हाथरस 06 मई । कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में ‘मृदा स्वास्थ्य के लिए हरी खाद का महत्व’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का बुधवार को सफल समापन हुआ। 4 मई से 6 मई 2026 तक चले इस विशेष सत्र का आयोजन केवीके प्रभारी डॉ. एस.आर. सिंह के निर्देशन में किया गया, जिसमें क्षेत्र के बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. बलवीर सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि फसलों में अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता और जैविक शक्ति का निरंतर ह्रास हो रहा है। उन्होंने बताया कि ‘हरी खाद’ (जैसे ढैंचा और सनई) मिट्टी को प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन प्रदान करने का सबसे सशक्त माध्यम है। इससे न केवल मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ती है, बल्कि उसकी भौतिक संरचना में भी सुधार आता है।

उन्नत तकनीक और सही समय पर जोर

विशेषज्ञ डॉ. आकांक्षा ने किसानों को हरी खाद उगाने की वैज्ञानिक तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि हरी खाद की फसल को सही समय पर खेत में पलटना (मल्चिंग) आवश्यक है ताकि वह मिट्टी में पूरी तरह गलकर पोषक तत्वों में परिवर्तित हो सके। उन्होंने बताया कि लंबे समय में यह तकनीक खेती की लागत कम कर किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।

किसानों ने लिया संकल्प

प्रशिक्षण के दौरान केवीके के वैज्ञानिकों ने किसानों के सवालों और शंकाओं का समाधान भी किया। तीन दिनों तक चले इस सत्र के समापन पर उपस्थित किसानों ने मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए अपने खेतों में अधिक से अधिक हरी खाद का उपयोग करने और रसायनों के उपयोग को धीरे-धीरे कम करने का संकल्प लिया।

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