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नई दिल्ली 26 मार्च । राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ सांसद रामजीलाल सुमन ने विशेष उल्लेख के जरिए देश की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं की दयनीय स्थिति का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया। श्री सुमन ने सदन के माध्यम से सरकार से मांग की है कि ग्रामीण अंचल में समर्पित भाव से सेवा दे रही इन कार्यकर्ताओं की सेवाओं को नियमित किया जाए और उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित ‘कुशल न्यूनतम मजदूरी’ के बराबर मानदेय प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (2005) के तहत कार्यरत ये कार्यकर्ताएं स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं, लेकिन वर्तमान महंगाई के दौर में उन्हें मिलने वाला मेहनताना उनके श्रम का उपहास मात्र है।

अत्यधिक कम मानदेय और भत्तों पर जताई चिंता

सांसद रामजीलाल सुमन ने आंकड़ों के जरिए सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि विगत दो दशकों से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रही आशा कार्यकर्ताओं को मात्र ₹2000 प्रति माह मानदेय दिया जा रहा है। बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने के बदले इन्हें सिर्फ ₹75 और टीकाकरण के लिए मात्र ₹150 प्रतिदिन दिया जाता है, वह भी महीने में केवल दो-तीन बार। वहीं, गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित प्रसूति कराने पर मिलने वाले ₹600 को उन्होंने उनकी जिम्मेदारी और मेहनत के मुकाबले नगण्य बताया। उन्होंने कहा कि इतने कम पारिश्रमिक में पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना नामुमकिन है।

कोरोना काल के योगदान का किया स्मरण

सदन में अपनी बात रखते हुए श्री सुमन ने कहा कि कोरोना काल के संकटपूर्ण समय में इन कार्यकर्ताओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर घर-घर जागरूकता फैलाने और सर्वेक्षण करने का सराहनीय कार्य किया था। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह इनके श्रम का सही मूल्यांकन करे, ताकि प्रोत्साहित होकर ये कार्यकर्ताएं और अधिक निष्ठा के साथ अपने दायित्वों को निभा सकें। सांसद ने जोर देकर कहा कि आशा कार्यकर्ताओं को सम्मानजनक वेतन और सुविधाएं देना सामाजिक न्याय और सुदृढ़ स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए अनिवार्य है।

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