
हाथरस 09 अप्रैल । इस वर्ष मार्च और अप्रैल के महीनों में कुदरत के बदले मिजाज ने किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। बेमौसम बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि के बार-बार होने वाले प्रहार ने गेहूं की फसल की रंगत पूरी तरह उड़ा दी है। स्थिति यह है कि खेतों में तैयार खड़ी और कटी हुई फसल बार-बार भीगने के कारण अब काली पड़ने लगी है, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो बीते 20 मार्च से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला अब तक थमा नहीं है। मार्च और अप्रैल में कुल मिलाकर 10 बार मौसम ने अपनी मार दिखाई है। 31 मार्च को आई तेज आंधी और ओलावृष्टि ने फसल को जमीन पर बिछा दिया था। इसके बाद अप्रैल माह के शुरुआती सप्ताह में भी लगातार हो रही बूंदाबांदी और तेज बारिश ने फसल को सूखने का मौका नहीं दिया। बार-बार फसल के भीगने और फिर तेज धूप निकलने की प्रक्रिया ने गेहूं की गुणवत्ता को भारी नुकसान पहुँचाया है। नमी के कारण बालियों में फफूंद जैसा कालापन आने लगा है और सुनहरे दानों की चमक खो गई है। किसानों का कहना है कि गेहूं की रंगत खराब होने की वजह से अब उन्हें मंडियों और खुले बाजार में उचित दाम मिलना भी मुश्किल होगा।
खेतों में फसल गिर जाने के कारण अब उसकी कटाई भी किसानों के लिए सिरदर्द बन गई है। गिरी हुई फसल को हाथ से काटना पड़ता है, जिसके लिए मजदूर अब सामान्य से कहीं अधिक मजदूरी मांग रहे हैं। मशीन (कंबाइन) से कटाई गिर चुकी फसल में संभव नहीं हो पा रही है, जिससे लागत बढ़ती जा रही है और पैदावार घटने की आशंका है। लगातार हो रही इस ‘आसमानी आफत’ के बाद अब किसान केवल इस उम्मीद में हाथ जोड़कर बैठा है कि बारिश थमे और तेज धूप निकले, ताकि खेतों में जमा नमी सूखे और वे अपनी बची-कुची फसल को सुरक्षित घर तक ले जा सकें। फिलहाल, बर्बादी के मंजर को देख ग्रामीण क्षेत्रों में मायूसी का माहौल है।


























