
हाथरस 09 अप्रैल । जे.टी.आर.आई. लखनऊ के निर्देशानुसार एवं जनपद न्यायाधीश विनय कुमार-III की अध्यक्षता में गुरुवार को जनपद न्यायालय के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। ‘सतत सीखने हेतु वातावरण निर्मित करने’ के उद्देश्य से आयोजित इस सत्र में न्यायिक अधिकारियों को मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम की बारीकियों से अवगत कराया गया। मुख्य वक्ता डॉ. मिथुन घोष ने समस्त न्यायिक अधिकारियों को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया समझाते हुए बताया कि इसमें बाहरी जांच के तहत शरीर पर चोट, खरोंच और रंग में बदलाव के आधार पर मौत के समय का आकलन किया जाता है। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान मुख्य रूप से ‘Y’ या ‘I’ आकार का चीरा लगाया जाता है। आंतरिक जांच में दिल, फेफड़े, लिवर और दिमाग जैसे अंगों का परीक्षण कर अंदरूनी चोट या बीमारी का पता लगाया जाता है। डॉ. घोष ने स्पष्ट किया कि यदि जहर का संदेह हो, तो अंगों के नमूने (विसरा) फॉरेंसिक लैब भेजे जाते हैं। इससे वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट हो जाता है कि मौत का सटीक कारण दम घुटना है, सदमा है या कोई अन्य गंभीर चोट। इसके अतिरिक्त, उन्होंने शरीर पर लगने वाले बाहरी बल, दुर्घटना या तेज वस्तु से होने वाली चोटों के प्रकार और उनके लक्षणों पर भी विस्तृत जानकारी साझा की। इस अवसर पर अपर जनपद न्यायाधीशगण महेंद्र श्रीवास्तव, हर्ष अग्रवाल, निर्भय नरायन राय, शैलेंद्र सिंह, महेंद्र कुमार रावत और प्रशांत कुमार उपस्थित रहे। साथ ही मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जय हिन्द कुमार सिंह, सिविल जज (व.प्र.) आकांक्षा गर्ग, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपकनाथ सरस्वती, सिविल जज (क.प्र.) हर्षिका रस्तोगी एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट खुशबू चन्द्रा ने भी कार्यशाला में प्रतिभाग कर चिकित्सा-विधिक ज्ञान अर्जित किया।


























