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हाथरस 24 मार्च । जनपद के बहुचर्चित ‘प्रोफेसर कांड’ में आज हाथरस की एडीजे एफटीसी कोर्ट प्रथम ने अपना फैसला सुनाते हुए बागला डिग्री कॉलेज के चीफ प्रोक्टर प्रोफेसर डॉ. रजनीश को यौन शोषण के सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। न्यायालय के इस निर्णय के बाद डॉ. रजनीश और उनके शुभचिंतकों ने राहत की सांस ली है। आपको बता दें कि 15 मार्च 2024 को डॉ. रजनीश के विरुद्ध यौन शोषण की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था, जिसके बाद 21 मार्च को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पिछले एक साल से यह प्रकरण जनपद और शिक्षा जगत में काफी चर्चाओं का विषय बना हुआ था। कोतवाली हाथरस गेट में 15 मार्च 2025 को प्रोफेसर व कॉलेज के चीफ प्रोक्टर डा. रजनीश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। एक पीड़ित छात्रा ने राष्ट्रीय महिला आयोग व अन्य पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों को गुमनाम पत्र भेजा था, जिसके बाद हुई प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की थी। गत वर्ष 21 मार्च को पुलिस ने प्रोफेसर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तब से प्रोफेसर जेल में बंद थे और इस साल ही वे जमानत पर बाहर आए हैं। एफआईआर दर्ज होने के 18 माह पहले से यह प्रकरण चल रहा था। पूर्व में भी शिकायत हुई थीं, जिसमें तीन बार जांच हो चुकी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। इन्हीं जांचों का हवाला देते हुए प्रोफेसर ने वीडियो व फोटो एडिटड बताते हुए खुद को निर्दोश बताया था। 20 मार्च को इस मामले में गवाही पूरी हो गई थी। शहर के इस बहुचर्चित कांड पर सबकी निगाहें टिकी हुई थीं।

यह मामला पिछले साल छह मार्च को एक गुमनाम पत्र के साथ शुरू हुआ था। यह पत्र महिला आयोग को भेजा गया था, जिसमें शिकायतकर्ता ने खुद को छात्रा बताया था। इस पत्र में आरोप लगाया गया था कि बागला डिग्री कालेज के प्रोफेसर डा. रजनीश लंबे समय से उसका यौन शोषण कर रहे हैं। पत्र के साथ कुछ फोटो और वीडियो भी भेजे गए थे। इसी तरह की कुछ अन्य शिकायत भी आई थी। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने प्रोफेसर रजनीश के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था और गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। पुलिस ने इस मामले में न्यायालय में आरोपपत्र भी दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान आरोपित पक्ष के अधिवक्ता चौधरी वीरेंद्र सिंह ने दलील दी कि रजनीश को केवल कुछ वीडियो के आधार पर आरोपी बनाया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान में एआई का दौर है, जिसमें किसी भी इलेक्ट्रानिक वीडियो को आसानी से फर्जी तरीके से तैयार किया जा सकता है। अभियोजन पक्ष ने प्रकरण को साबित करने के लिए नौ गवाह प्रस्तुत किए, जिनमें से तीन पीड़िताएं थीं। हालांकि, अभियोजन द्वारा केवल एक पीड़िता को ही मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराने के लिए प्रस्तुत किया गया। अन्य किसी पीड़िता को बयान दर्ज कराने के लिए पेश नहीं किया गया। कोर्ट में दी गई गवाहियों में किसी भी पीड़िता ने आरोपितों द्वारा किसी घटना को अंजाम दिए जाने के आरोपों की पुष्टि नहीं की, बल्कि उन्होंने साफ तौर पर इनकार किया है। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि आरोपित को फंसाने के उद्देश्य से ही किसी ने फर्जी और मनगढ़ंत वीडियो तैयार कर भेजे हों। पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में अभियुक्त रजनीश को आरोपों से दोषमुक्त किया गया।

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