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नई दिल्ली 23 मार्च । देश में दवाओं की गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने एक व्यापक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है। नियामक ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रकों को निर्देश दिए हैं कि वे 90 फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं की तत्काल जांच करें और आवश्यक नियामकीय कार्रवाई सुनिश्चित करें। सूत्रों के अनुसार, यह कदम ‘सुगम लैब परीक्षण डेटा 2025’ में बड़ी संख्या में दवाओं के नमूनों के अप्रमाणित पाए जाने के बाद उठाया गया है। इन दवाओं को ‘नई दवा’ की श्रेणी में रखा गया है, जिनका निर्माण और बिक्री ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के नियमों के विरुद्ध, बिना केंद्रीय लाइसेंसिंग प्राधिकरण की अनुमति के की जा रही थी।

इस जांच के दायरे में दैनिक उपयोग में आने वाली कई महत्वपूर्ण दवाएं शामिल हैं, जिनमें मल्टीविटामिन, फोलिक एसिड, विभिन्न सिरप, पैरासिटामोल, क्लोट्रिमाज़ोल और बेटामेथासोन क्रीम के साथ-साथ डाइक्लोफेनाक पोटेशियम और डाइसाइक्लोमाइन हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट्स प्रमुख हैं। डीसीजीआई ने राज्यों को भेजे अपने कड़े पत्र में स्पष्ट किया है कि आपूर्ति शृंखला में ऐसी अप्रमाणित दवाओं की मौजूदगी आम जनता के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है। नियामक ने संबंधित निर्माताओं, विपणनकर्ताओं और अन्य हितधारकों के खिलाफ सख्त निगरानी रखने और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, राज्यों से इस मामले में ‘त्वरित कार्रवाई रिपोर्ट’ (ATR) मांगी गई है और इस विषय को जनहित में सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा गया है।

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