सिकंदराराऊ 23 मार्च । दूर-दराज के गांवों से शहरों में शिक्षा ग्रहण करने आए छात्रों और आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे मजदूर परिवारों के सामने रसोई गैस (एलपीजी) की बढ़ती कीमतें और अनुपलब्धता एक गंभीर संकट बनती जा रही है। इस ज्वलंत मुद्दे पर ठाकुर विजय प्रताप सिंह ने सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए तत्काल राहत की मांग की है। विजय प्रताप सिंह ने कहा कि शहरों में किराए के कमरों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र महंगाई की दोहरी मार झेल रहे हैं। गैस सिलेंडर की ऊँची कीमतों के कारण उनका मासिक बजट बिगड़ गया है, जिससे उनकी पढ़ाई और खान-पान प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि एक तरफ छात्र अपना भविष्य बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी जरूरतों के लिए उन्हें भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।
छात्रों के साथ-साथ शहर में रहने वाले नौकरीपेशा युवाओं और दिहाड़ी मजदूरों की स्थिति भी दयनीय है। विजय प्रताप सिंह ने कहा, “मजदूर वर्ग अपनी रोज की कमाई से घर चलाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सिलेंडर की कीमतों में उछाल और समय पर उपलब्धता न होने से उनके चूल्हे ठंडे होने की कगार पर हैं।” उन्होंने सरकार को याद दिलाया कि जनता की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। ठाकुर विजय प्रताप सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि गैस सिलेंडर की कीमतों पर नियंत्रण पाने के साथ-साथ इसकी सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि गरीब, छात्र और मजदूर वर्ग की समस्याओं को उठाना उनका कर्तव्य है और यदि जल्द ही राहत नहीं मिली, तो जनता की इस आवाज को बड़े स्तर पर प्रशासन तक पहुँचाया जाएगा।


























