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हाथरस 02 अप्रैल । जिले में निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण और चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी अतुल वत्स ने एक बड़ा कदम उठाया है। डीएम ने जिले की सीमा से बाहर भूसे के परिवहन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह निर्णय आगामी वित्तीय वर्ष में गोशालाओं में चारे के पर्याप्त भंडारण और स्थानीय पशुपालकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। जिलाधिकारी अतुल वत्स ने बताया कि अप्रैल माह में गेहूं की फसल की कटाई शुरू हो रही है, जो भूसा उत्पादन का मुख्य समय है। अक्सर देखा जाता है कि अधिक मुनाफे के लालच में भूसे को अन्य जनपदों या राज्यों में भेज दिया जाता है। इससे स्थानीय स्तर पर चारे की भारी कमी हो जाती है और कीमतें आसमान छूने लगती हैं। इस समस्या के समाधान के लिए प्रतिबंध लगाना आवश्यक हो गया था। शासन के निर्देशों का हवाला देते हुए डीएम ने स्पष्ट किया कि गौ आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंश के लिए भूसे का टेंडर और भंडारण प्रक्रिया समय पर पूरी की जानी है। उन्होंने जिले के सभी थाना प्रभारियों, खंड विकास अधिकारियों (BDO) और अधिशासी अधिकारियों (नगर पालिका/पंचायत) को निर्देशित किया है कि वे अपने क्षेत्रों में भूसे के अवैध परिवहन पर कड़ी नजर रखें। विशेष रूप से पड़ोसी जिलों की सीमाओं से सटे विकास खंडों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

किसानों और पशुपालकों को मिलेगी राहत

प्रशासन का मानना है कि इस प्रतिबंध से न केवल सरकारी गोशालाओं को पर्याप्त आहार मिलेगा, बल्कि जिले के आम किसानों और पशुपालकों को भी चारे की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा। जिला कृषि अधिकारी और अपर मुख्य अधिकारी को भी इन निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए कहा गया है।

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