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सादाबाद 22 मार्च । कस्बे के लोकतंत्र सेनानियों ने स्थानीय रामलीला ग्राउंड में आपातकाल का विजय दिवस मनाया। 21 महीने के लंबे समय के बाद जब लोकतंत्र का पुनर्जन्म हुआ तो लोकतंत्र सेनानियों ने विजय दिवस मनाया था। उन दिनों की यादों को ताजा करते हुए सेनानियों को सुविधाएं दिए जाने की मांग कार्यक्रम में रखी गई। लोकतंत्र सेनानियों ने बताया कि यह एक ऐतिहासिक और गौरवशाली विषय है। 1977 में जब भारत से आपातकाल हटा, तो वह दिन भारतीय लोकतंत्र के लिए ‘पुनर्जन्म’ जैसा था। भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। 21 महीनों के लंबे और दमनकारी आपातकाल के अंत के साथ ही पूरे देश में उत्सव का माहौल था। तानाशाही की बेड़ियों के टूटने की खुशी में देशभर के लोकतंत्र सेनानियों ने ‘विजय दिवस’ के रूप में मनाया। जेलों से छूटे ‘क्रांतिकारी’, गूंजा इंकलाब जैसे ही सरकार ने आपातकाल हटाने और चुनावों की घोषणा की, देशभर की जेलों के दरवाजे खुल गए। मीसा और डीआईआर के तहत बंद हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं और सत्याग्रहियों के बाहर आते ही जनता ने उनका फूलों और ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया। देश के हर कोने में विजय जुलूस निकाले गए। वह केवल एक राजनीतिक बदलाव नहीं था, बल्कि भारत की आत्मा की फिर से जीत थी। सेनानियों ने जो जेल की कालकोठरियों में यातनाएं झेलीं, वे सार्थक हो गईं थीं। कार्यक्रम में दिनेश चंद्र वार्ष्णेय, केशव देव, नारायण दत्त शर्मा, सोमप्रकाश वार्ष्णेय आदि लोकतंत्र सेनानी मौजूद रहे।

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