
हाथरस 18 मार्च । भारतीय संस्कृति और सभ्यता में नवसंवत्सर का विशेष महत्व है। यह न केवल सृष्टि की शुरुआत का दिन है, बल्कि हमारे आध्यात्मिक कैलेंडर का आधार भी है। इसी गौरवशाली परंपरा को जीवंत करने और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से डाक टिकट व सिक्का संग्रहकर्ता शैलेंद्र वार्ष्णेय ‘सर्राफ’ ने अपने निवास पर एक अनूठी प्रदर्शनी का आयोजन किया।
दुर्लभ पत्रों और सिक्कों में दिखी हिन्दू संस्कृति
प्रदर्शनी में शैलेंद्र वार्ष्णेय ने अपने संग्रह से पुराने पत्र, स्टांप पेपर और ऐसे सिक्के प्रदर्शित किए, जिन पर हिन्दू वर्ष ‘नवसंवत्सर’ अंकित है। ये ऐतिहासिक दस्तावेज भारतीय परंपरा और संस्कृति का जीवंत संदेश देते हैं। प्रदर्शनी के दौरान श्री वार्ष्णेय ने इस बात पर दुख व्यक्त किया कि आधुनिकता की दौड़ में नवसंवत्सर अपनों के बीच ही बेगाना होता जा रहा है।
अतिथियों ने सराहा संग्रह
इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित नगर अध्यक्ष विवेक महाजन और मनोनीत सभासद मूलचंद वार्ष्णेय ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इस प्रयास की सराहना की। अंतरराष्ट्रीय विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष पंकज अग्रवाल, सर्राफा कमेटी हाथरस के अध्यक्ष मोहनलाल अग्रवाल, मनोज वार्ष्णेय और देवांशू वार्ष्णेय ‘दीपू’ भी इस दौरान उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि अपनी गौरवशाली विरासत को संजोना समय की मांग है।
सरकारी अभिलेखों में नवसंवत्सर अंकित करने की मांग
शैलेंद्र वार्ष्णेय ने बताया कि उन्होंने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर मांग की है कि सरकारी स्तर पर अभिलेखों में नवसंवत्सर का उल्लेख अनिवार्य किया जाए। साथ ही, युवा पीढ़ी को इसका महत्व बताने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि भारतीय परंपराओं को आधिकारिक मान्यता देकर इन्हें विलुप्त होने से बचाया जाए।


























