हाथरस 15 मार्च । आज सावन कृपाल रूहानी मिशन की शाखा ” कृपाल आश्रम” गौशाला मार्ग पर साप्ताहिक आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन हुआ। सत्संग दयाल पुरुष संत दर्शन सिंह जी महाराज एवं संत राजिंदर सिंह जी महाराज की अमृतमयी वाणी द्वारा प्रस्तुत किया गया। सत्संग में महाराज जी ने मानव जीवन के परम लक्ष्य के बारे में जानकारी दी। और समझाया कि हमारे जीवन का परम लक्ष्य स्वयं को सही रूप में जानना व प्रभु में लीन होना है। हमारा मूल स्रोत एक वही अविनाशी आदि सत्ता है। तथा उसी आदि शक्ति से ही सारी सृष्टि का सृजन हुआ है। इसी कड़ी में महाराज जी ने आगे समझाया कि प्रभु आदि ,अनामि और अविनाशी हैं। चूंकि हमारा वास्तविक स्वरूप आत्मिक है, इसलिए हमारी आत्मा भी अविनाशी है, और प्रभु का ही अंश है। महाराज जी द्वारा यह भी समझाया गया कि हमारी आत्मा के स्वामी तथा सच्चे प्रियतम स्वयं पिता परमात्मा हैं। जिस तरह से हम अपने प्रियतम को रिझाने के लिए अनेक प्रकार के सोने चांदी, हीरे, मोती, माणिक आदि जड़े आभूषण पहनते हैं। ठीक उसी प्रकार हमारी आत्मा को अपने प्रियतम अर्थात पिता पर्मेश्वर को रिझाने के लिए आध्यात्मिक गहने धारण करने चाहिए। महाराज जी ने ऐसे पांच आध्यात्मिक रत्न जडित आभूषणों के बारे में बताया। जिन्हे धारण करके हम अपने प्रियतम को रिझा सकते हैं, अर्थात हमारी आत्मा अपने मूल स्रोत में समाहित हो सकती है।
“तुलसी या संसार में पांच रतन हैं सार।
साध संग, सतगुरु शरण, दया, दीन, उपकार”।।
सभी साध संगत द्वारा बड़े ही धैर्य पूर्वक आज के सत्संग का श्रवण किया गया। सत्संग के साथ साथ आश्रम पर अन्य गतिविधियां जैसे बाल सत्संग, आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक, एलोपैथिक डिस्पेंसरी, आध्यात्मिक बुक स्टाल, दर्शन लाइब्रेरी आदि भी आयोजित की गयीं। सत्संग के पश्चात सभी साध संगत हेतु लंगर प्रसादी भी वितरित की गयी। सभी सेवादारों ने बढ़ चढ़कर सेवा में हिस्सा लिया।


























