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हाथरस 11 मार्च । प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी हृदयमोहिनी का पंचम स्मृति दिवस ‘दिव्यता दिवस’ के रूप में तथा पूर्व संयुक्त प्रशासिका दादी चन्द्रमणी का स्मृति दिवस ‘शक्ति दिवस’ के रूप में शांतिपूर्ण एवं श्रद्धापूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन अलीगढ़ रोड स्थित शांति भवन में किया गया। प्रातः कालीन राजयोग क्लास में बीके शांता बहन ने दादी हृदयमोहिनी जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संपन्न परिवार से होने के बावजूद उनका जीवन अत्यंत सरल, सादा और पवित्र था। उन्होंने बताया कि मात्र आठ वर्ष की आयु में वे अपनी माता के साथ पहली बार ब्रह्मा बाबा द्वारा चलाए जा रहे सत्संग में आईं और वहीं उन्हें शिव बाबा का साक्षात्कार हुआ। इसके बाद वे संगठन से जुड़कर बच्चों के लिए संचालित बोर्डिंग स्कूल में रहने लगीं और जीवन भर आध्यात्मिक सेवा में समर्पित रहीं। कार्यक्रम में राकेश अग्रवाल ने कहा कि दादीजी आत्मस्वरूप स्थिति में रहकर व्यवहार करती थीं और उनके लिए अमीर-गरीब, छोटा-बड़ा सभी समान थे। वहीं बीके दिनेश भाई ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि दादीजी हमेशा सादगी और समर्पण का संदेश देती थीं और कहती थीं कि व्यक्ति को अपनी सभी जिम्मेदारियां ट्रस्टी बनकर परमात्मा को अर्पित कर देनी चाहिए। इससे पूर्व आयोजित प्रातःकालीन सत्र में दाऊदयाल अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल, राजीव सिंघल, राकेश अग्रवाल, यतेन्द्र आर्य, राजेश शर्मा, लक्ष्मी बहन, कोमल बहन और मोनिका बहन सहित अन्य श्रद्धालुओं ने दादी हृदयमोहिनी जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम का संचालन बीके मोहिनी बहन और वंदना बहन ने किया।

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