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हाथरस 10 मार्च । जिले में इन दिनों आलू की खोदाई चरम पर है। इसके साथ ही आलू के व्यापार का तरीका भी बदलता दिखाई दे रहा है। इस बार कई स्थानों पर मंडियों के बजाय सीधे खेतों में ही आलू की खरीद-फरोख्त हो रही है। व्यापारी मजदूरों, ट्रैक्टरों और बारदाना के साथ किसानों के खेतों तक पहुंचकर आलू की खुली बोली लगा रहे हैं, जबकि कोल्ड स्टोरेजों पर फिलहाल सन्नाटा नजर आ रहा है। जिले में इस बार लगभग 52 हजार हेक्टेयर में आलू की पैदावार हुई है। सादाबाद, सासनी, सहपऊ और आसपास के आलू उत्पादक क्षेत्रों में सुबह से देर शाम तक खोदाई का काम जारी है। खेतों में खोदाई के साथ ही व्यापारियों की आवाजाही भी बढ़ गई है और कई जगह खेत ही अस्थायी मंडी का रूप लेते नजर आ रहे हैं। आलू की छंटाई कर कट्टों में भरकर ट्रैक्टरों में लाद दिया जाता है और तुरंत उठान कर लिया जाता है।

वर्तमान में जिले में 3797 और सूर्या किस्म के आलू का भाव 550 से 650 रुपये प्रति कट्टा (50 किलो) तक मिल रहा है। वहीं चिप्सौना आलू 500 से 525 रुपये और हाईब्रिड आलू 400 से 450 रुपये प्रति कट्टा तक बिक रहा है। हालांकि कीमत आलू की किस्म, साइज और गुणवत्ता पर निर्भर कर रही है। किसानों को लोन, बारदाना उपलब्ध कराने और ढुलाई में सहयोग जैसी सुविधाएं भी व्यापारी दे रहे हैं। कुछ व्यापारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर किसानों को आर्थिक सहयोग भी दिया जाएगा ताकि वे तत्काल बिक्री के दबाव में न आएं।

खोदाई से पहले ही तय हो रहे सौदे

कुछ व्यापारी खोदाई से पहले ही खेतों का निरीक्षण कर अनुमानित पैदावार के आधार पर सौदा तय कर लेते हैं। तय दिन मजदूरों के साथ पहुंचकर आलू निकलवाते हैं और सीधे उठान कर लेते हैं। किसानों का कहना है कि इससे उन्हें मंडी तक आलू ले जाने की परेशानी से राहत मिल जाती है और मजदूरी, पैकिंग व ढुलाई की व्यवस्था भी व्यापारी ही कर देते हैं। जिन खेतों में साफ और बड़े आकार का आलू निकल रहा है वहां व्यापारी ज्यादा कीमत देने को तैयार हैं। खासकर 3797 और सूर्या किस्म के आलू की मांग अधिक देखी जा रही है।

8 से 10 दिनों में पूरी हो जाएगी अधिकांश खोदाई

पिछले एक सप्ताह से मौसम साफ रहने के कारण खोदाई की गति तेज हुई है। गांवों में सुबह से ट्रैक्टरों और मजदूरों की आवाजाही शुरू हो जाती है और खेतों में खोदाई, छंटाई और पैकिंग का काम एक साथ चलता रहता है। किसानों का कहना है कि मौसम अनुकूल रहा तो अगले 8 से 10 दिनों में अधिकांश खेतों से आलू निकल जाएगा।

कोल्ड स्टोरेजों में अभी सन्नाटा

तेज खोदाई के बावजूद इस बार जिले के कई कोल्ड स्टोरेजों में अभी अपेक्षित भीड़ नहीं दिख रही है। पिछले वर्षों में इस समय तक कोल्ड स्टोरेजों के बाहर ट्रैक्टर-ट्रालियों की लंबी कतारें लग जाती थीं, लेकिन इस बार कई स्थानों पर अभी सन्नाटा नजर आ रहा है। कम पैदावार और खेतों से सीधे हो रही बिक्री के कारण शुरुआती दिनों में कोल्ड स्टोरेजों में आलू की आवक कम बताई जा रही है।

मजदूरों की बढ़ी मांग

आलू की खोदाई तेज होने के साथ ही खेतों में मजदूरों की मांग भी बढ़ गई है। खोदाई, छंटाई और पैकिंग के लिए बड़ी संख्या में मजदूर लगाए जा रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में मजदूरों की कमी के कारण किसानों को बाहर से मजदूर बुलाने पड़ रहे हैं, जिससे मजदूरी दरों में भी हल्की बढ़ोतरी देखी जा रही है।

गुणवत्ता पर निर्भर कर रहा भाव

व्यापारियों का कहना है कि इस समय आलू का भाव पूरी तरह गुणवत्ता पर निर्भर कर रहा है। साफ और मीडियम साइज के आलू को बेहतर कीमत मिल रही है, जबकि हल्के या मिश्रित साइज के आलू का भाव लगभग 100 रुपये तक कम मिल रहा है। इसी कारण किसान खोदाई के दौरान आलू की अच्छी तरह छंटाई करवा रहे हैं।

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