सिकंदराराऊ (हसायन) 09 मार्च । विकासखंड क्षेत्र के कस्बा सहित देहात के ग्रामीण अंचलों में सोमवार, 9 मार्च को चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर बासौड़ा (शीतला सप्तमी/अष्टमी के लोक पर्व) का आयोजन पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ किया गया। महिलाओं ने सुबह ब्रह्म मुहूर्त में मंदिरों और होलिका दहन स्थलों पर पहुँचकर माता शीतला की पूजा-अर्चना की और जल से अभिषेक किया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रविवार की रात को ही घरों में मीठे चावल, पूड़ी, रबड़ी, हलवा और चने जैसे विभिन्न पकवान तैयार कर लिए गए थे। सोमवार भोर की पहली किरण के साथ ही महिलाएं सज-धजकर शीतला माता के मंदिरों की ओर रुख करती दिखाई दीं। श्रद्धालुओं ने माता रानी को बासी नैवेद्य अर्पित कर परिवार की खुशहाली और बच्चों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
इन मंदिरों में लगीं लंबी कतारें
कस्बे के प्रमुख धार्मिक स्थलों जैसे श्री हनुमान जी महाराज मंदिर, केला देवी मंदिर, श्रीगंगा मंदिर, श्रीबलभद्र दाऊबाबा रेवती मैया मंदिर, प्राचीन शिव टुकिया मंदिर और पथवारी मंदिर में जलाभिषेक के लिए महिलाओं की लंबी कतारें देखी गईं। श्रद्धालुओं ने रोली, अक्षत और जल अर्पित कर विधि-विधान से माता की आराधना की।
रोगों से मुक्ति और ऋतु परिवर्तन का प्रतीक
धार्मिक मान्यता है कि शीतला माता की पूजा करने से परिवार के सदस्यों को चेचक, खसरा, चिकन पॉक्स और गर्मी से होने वाली बीमारियों से मुक्ति मिलती है। इस पर्व के साथ ही ग्रीष्म ऋतु का पूर्ण आगमन माना जाता है और इसके बाद से ही बासी भोजन करना वर्जित हो जाता है। पूजन के पश्चात महिलाओं ने घर की देहरी पर जल छिड़ककर सुख-शांति की प्रार्थना की और पारंपरिक लोकगीत गाकर पर्व का आनंद लिया।



































