
हाथरस 05 मार्च । ब्रज क्षेत्र की समृद्ध परंपरा को समेटे हुए हाथरस शहर में आज शाम गोविंद भगवान की विशाल रथयात्रा अत्यंत हर्षोल्लास के साथ निकाली गई। घंटाघर स्थित प्राचीन गोविंद भगवान मंदिर से शुरू हुई इस ऐतिहासिक यात्रा में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरा शहर ‘गोविंद’ के जयकारों से गूंज उठा। रथयात्रा का श्रीगणेश मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना और भव्य आरती के साथ किया गया। इसके उपरांत जब भगवान का रथ आगे बढ़ा, तो श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। इस वर्ष रथयात्रा के शुभारंभकर्ता रेलवे के वरिष्ठ खंड अभियंता इंजीनियर शिवांग वार्ष्णेय रहे। मुख्य अतिथि के रूप में गीताराम वार्ष्णेय (कोल्ड स्टोर वाले) और विशिष्ट अतिथि के रूप में गिरधर गोपाल वार्ष्णेय (पेंट्स डीलर) ने सहभागिता की। आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों का जोशीला स्वागत और सम्मान किया गया। शोभायात्रा में शामिल दर्जनों आकर्षक झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं, जिनमें विभिन्न देवी-देवताओं के सजीव स्वरूप और धार्मिक प्रसंगों का सजीव चित्रण किया गया था। भक्ति संगीत की धुनों पर थिरकते बैंड वादकों और हैरतअंगेज करतब दिखाते कलाकारों ने यात्रा की भव्यता में चार चांद लगा दिए।

115 वर्ष पुराण है भव्य रथयात्रा का इतिहास
हर साल रंगभरनी एकादशी से गोविंद भगवान रथयात्रा महोत्सव की शुरुआत होेती है। यही वजह है कि रविवार की रात को रथ व डोला को मंदिर पर खड़ा कर दिया गया है। इन दोनों को सजाए जाने का काम किया जा रहा है। घंटाघर के गोविंद भगवान मंदिर की स्थापना वार्ष्णेय समाज की ओर से वर्ष 1940 में की गई थी। तभी से यहां महोत्सव का आयोजन किया जाने लगा, लेकिन स्थापना के 27 साल बाद वर्ष 1912 में वार्ष्णेय समाज की ओर से प्रथम रथयात्रा का आयोजन किया, जिसमें प्रभु अपनी प्रिया संग नगर यात्रा करते हैं।
शुरू में न मंजिला का होता था रथ
शुरुआती दौर में यह रथ तीन मंजिला का होता था, लेकिन आवागमन में अधिक दिक्कत होने के कारण एक मंजिल को उतार दिया गया। इसलिए आज भी इसे तीन मंजिला रथ कहा जाता है। वर्ष 1969 में तत्कालीन नगर पालिका चेयरमैन रमाशंकर वार्ष्णेय ने रथ के पहियों को बदलवाया था। इस रथ में लगे लकड़ी के पहियों को संग्रहालय में रखवाकर इसमें हवाई जहाज के पहिये लगाए गए थे। 1993 में इस रथ का जीर्णोद्धार मदन मोहन अपना वालों की अध्यक्षता में किया गया। इस रथ यात्रा को भव्यता देने के लिए हाथरस ही नहीं, बल्कि देश भर में रहने वाले वार्ष्णेय समाज के लोग तन-मन-धन से प्रयत्नशील रहते हैं।
रेलवे लाइन पार कराने के लिए आती थी टीम
एक समय था जब रथ को रेलवे लाइन पार कराए जाने के लिए बकायदा रेलवे का स्टाफ मथुरा से आता था, जो रेलवे सिग्नल के तारों को हटाता था व बाद में उन्हें जोड़ता था। इसके लिए रथयात्रा कमेटी की ओर से पहले से मथुरा में सूचना दी जाती थी। अब ओएचई लाइन होने के बाद रथ से डोले में भगवान को विराजमान कर रेलवे लाइन को पार कराया जाता है।
जगह-जगह हुआ पुष्प वर्षा से स्वागत
यात्रा जिस मार्ग से भी गुजरी, वहां स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने पुष्प वर्षा कर गोविंद भगवान का अभिनंदन किया। शहर भर में सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम रहे और रथयात्रा मार्ग को सुंदर रोशनी व ध्वजाओं से सजाया गया। देर रात तक चलने वाली इस शोभायात्रा को लेकर पूरे जनपद में भारी उत्साह का माहौल देखा गया।

यह रहे मौजूद
मेला अध्यक्ष मुकुल आनंद वार्ष्णेय, महामंत्री रंजीत वार्ष्णेय, कोषाध्यक्ष योगेंद्र वार्ष्णेय और मेला कार्यकारी अध्यक्ष प्रियांक वार्ष्णेय सर्राफ समेत शैलेन्द्र वार्ष्णेय, रवि वार्ष्णेय, भाजपा नेता दीपक वार्ष्णेय, प्रेम वार्ष्णेय, सागर वार्ष्णेय, देपु वार्ष्णेय, रमेश चंद्र गुप्ता, अजय वार्ष्णेय, कन्हैयालाल, कैलाशचंद, प्रहलाद वार्ष्णेय, अतुल चौधरी, राजीव वार्ष्णेय, ओमप्रकाश वार्ष्णेय, लक्ष्मीकांत वार्ष्णेय, जानकी प्रसाद वार्ष्णेय, सुभाष चंद्र, दिनेश वार्ष्णेय, राहुल वार्ष्णेय, अनुज वार्ष्णेय, तरुण पंकज, विजय वार्ष्णेय, हेमंत हलवाई, मनु आनंद वार्ष्णेय, तनु आनंद वार्ष्णेय, दाऊ दयाल वार्ष्णेय, हेमंत वार्ष्णेय, तरुण वार्ष्णेय, दीप वार्ष्णेय, बॉबी वार्ष्णेय, मुकेश वार्ष्णेय, देवांशु वार्ष्णेय, यीशु वार्ष्णेय, शिवम वार्ष्णेय, लब्बू वार्ष्णेय, पुष्कर वार्ष्णेय, अमन वार्ष्णेय, प्रवीण वार्ष्णेय, भवतोष वार्ष्णेय, सुंदर वार्ष्णेय व मनोज वार्ष्णेय आदि मौजूद रहे ।















































