
हाथरस 24 फरवरी । शहर के हृदय स्थल घंटाघर स्थित मंदिर श्री गोविंद भगवान से निकलने वाली ऐतिहासिक रथयात्रा की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। रंगभरनी एकादशी से शुरू होने वाले इस भव्य महोत्सव के लिए रविवार रात को रथ और डोला मंदिर प्रांगण में खड़ा कर दिया गया है। अपनी अनूठी विशेषताओं और 114 वर्षों के गौरवशाली इतिहास के कारण यह रथयात्रा पूरे देश में चर्चा का विषय रहती है।
हवाई जहाज के पहियों वाली अनूठी सवारी
इस रथ की सबसे बड़ी खासियत इसमें लगे हवाई जहाज के पहिये हैं। वर्ष 1969 में तत्कालीन नगर पालिका चेयरमैन रमाशंकर वार्ष्णेय ने रथ के पुराने लकड़ी के पहियों को हटाकर इसमें हवाई जहाज के टायर लगवाए थे, ताकि रथ का संचालन सुगम हो सके। लकड़ी के प्राचीन पहियों को आज भी संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है।
तीन मंजिला रथ का इतिहास
1912 में वार्ष्णेय समाज द्वारा शुरू की गई यह रथयात्रा प्रारंभ में तीन मंजिला हुआ करती थी। हालांकि, आवागमन और बिजली के तारों की बाधा के कारण बाद में इसकी एक मंजिल कम कर दी गई, लेकिन श्रद्धावश इसे आज भी ‘तीन मंजिला रथ’ ही पुकारा जाता है। 1993 में मदन मोहन ‘अपना’ की अध्यक्षता में इस रथ का भव्य जीर्णोद्धार कराया गया था।
जब रेलवे स्टाफ आता था मथुरा से
इस रथयात्रा से जुड़ा एक रोचक तथ्य यह भी है कि पहले जब यह रथ रेलवे लाइन पार करता था, तो मथुरा से रेलवे की तकनीकी टीम विशेष रूप से आती थी। वे सिग्नल के तारों को हटाकर रथ को रास्ता देते थे। वर्तमान में ओएचई (ओवरहेड इलेक्ट्रिक) लाइन होने के कारण, भगवान को रथ से डोले में विराजमान कर रेलवे लाइन पार कराई जाती है।
देशभर से जुटता है वार्ष्णेय समाज
महोत्सव को भव्य रूप देने के लिए हाथरस ही नहीं, बल्कि देशभर में बसे वार्ष्णेय समाज के लोग यहाँ पहुँचते हैं। मंदिर की स्थापना 1940 में हुई थी, लेकिन रथयात्रा की यह परंपरा इससे भी पुरानी है, जो आज भी अपनी पूरी भव्यता के साथ जीवंत है।












