सिकंदराराऊ (हसायन) 22 फरवरी । विकासखंड क्षेत्र के गांव बनवारीपुर स्थित श्री बांके बिहारी जी महाराज के 24वें प्राकट्योत्सव वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के चतुर्थ दिन रविवार को भक्ति की अविरल धारा बही। वृंदावन के सुप्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय रासाचार्य फतेह कृष्ण शर्मा की बृज रास मंडल के कलाकारों ने रासलीला का मनोहारी मंचन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में राधा-कृष्ण के स्वरूपों ने गोपियों संग मनमोहक रास नृत्य किया, जिससे पूरा वातावरण ‘राधे-राधे’ के उद्घोष से गुंजायमान हो गया।
इंद्र और वृत्रासुर के युद्ध का सजीव चित्रण
रासलीला के चतुर्थ दिवस पर कलाकारों ने ‘वृत्रासुर-भस्मासुर’ की पौराणिक कथा का मंचन किया। लीला में दिखाया गया कि किस प्रकार प्रजापति त्वष्ट के पुत्र विश्वरूप के वध के बाद, क्रोधित पिता ने यज्ञ की अग्नि से ‘वृत्रासुर’ को उत्पन्न किया। शिव भक्ति और वरदानों के अहंकार में चूर वृत्रासुर ने जब इंद्रलोक पर कब्जा कर लिया, तब भगवान विष्णु की सलाह पर देवराज इंद्र ने ऋषि दधीचि की अस्थियों से बने वज्र और समुद्र के झाग का सहारा लेकर उस अजेय असुर का अंत किया।
भक्तिमय हुआ वातावरण
लीला के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जब भी अधर्म बढ़ता है, तब देवी शक्ति और योगमाया के प्रभाव से बुराई का नाश अवश्य होता है। वृत्रासुर वध के बाद देवताओं द्वारा की गई देवी स्तुति ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। मंचन के उपरांत आयोजक समिति ने राधा-कृष्ण के स्वरूपों की आरती उतारी और प्रसाद वितरण किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्रीय श्रद्धालु उपस्थित रहे।















