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हाथरस 21 फरवरी । जनपद की साइबर क्राइम पुलिस टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए डिजिटल हस्ताक्षर (DSC) का दुरुपयोग कर कंपनी के डायरेक्टर को पद से हटाने और टेंडर की भारी-भरकम राशि हड़पने वाले दो शातिर जालसाजों को गिरफ्तार किया है। मामला ‘मैनी सक्सैना ट्रांसपोर्ट’ कंपनी से जुड़ा है, जहाँ आरोपियों ने करोड़ों रुपये के लालच में अपने ही पार्टनर के साथ विश्वासघात की पटकथा लिखी। पुलिस अधीक्षक चिरंजीव नाथ सिन्हा के निर्देशन में गठित टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मुख्य अभियुक्त अक्षय मैनी और उसके पिता नरेन्द्र मैनी को मुरादाबाद के मूढा पांडेय क्षेत्र से गिरफ्तार किया।

इस हाई-प्रोफाइल डिजिटल धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब वादी नवल किशोर शर्मा ने पुलिस को सूचना दी कि उन्हें बिना बताए उनके फर्जी डिजिटल हस्ताक्षर कर आरओसी (ROC) ऑफिस कानपुर के माध्यम से डायरेक्टर पद से हटा दिया गया है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने मार्च 2024 में इनकम टैक्स रिटर्न भरने के नाम पर वादी को भरोसे में लेकर उनके डिजिटल सिग्नेचर हासिल किए थे। इसके बाद एक योजनाबद्ध तरीके से रामपुर के एक बिना सीसीटीवी वाले साइबर कैफे से वादी का फर्जी त्यागपत्र अपलोड कर दिया गया। इतना ही नहीं, जालसाजों ने बैंक खातों से भी वादी का नाम हटवा दिया ताकि टेंडर के माध्यम से आने वाली धनराशि को वे व्यक्तिगत उपयोग में ला सकें।

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि टेंडर का पैसा आने पर उनके मन में लालच आ गया था, जिसके चलते उन्होंने कंपनी सेक्रेटरी निखिल रस्तोगी और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर इस पूरी साजिश को अंजाम दिया। हड़पी गई राशि का उपयोग आरोपियों ने अपनी निजी देनदारियों और ट्रकों की किश्तें चुकाने में किया। पुलिस ने पकड़े गए अभियुक्तों के खिलाफ बीएनएस और आईटी एक्ट की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। निरीक्षक आशीष कुमार सिंह के नेतृत्व वाली टीम अब इस घटना में शामिल अन्य फरार अभियुक्तों की तलाश में जुटी है।

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