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हाथरस 10 फरवरी । सीएमओ कार्यालय की वरिष्ठ लिपिक की गिरफ्तारी के बाद सोमवार को एंटी करप्शन की टीम ने कार्यालय पहुंचकर गहन छानबीन की। जिस कक्ष से महिला लिपिक की गिरफ्तारी हुई थी, उसे खुलवाकर विवेचना की औपचारिकताएं पूरी की गईं। प्रारंभिक जांच में पुलिस को कई कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मिली है, जो कथित तौर पर क्लाइंट्स को महिला लिपिक तक पहुंचाते थे। अब टीम इनके खिलाफ ठोस सबूत जुटाने में लगी है और कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। गौरतलब है कि प्रशिक्षु प्रशांत परमान निवासी सिकंदराराऊ की शिकायत पर 2 फरवरी को एंटी करप्शन अलीगढ़ की टीम ने महिला लिपिक बबिता चौहान को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। प्रशांत ने बी-फार्मा करने के बाद तीन माह के प्रशिक्षण हेतु सीएमओ कार्यालय में आवेदन किया था। आरोप है कि लिपिक ने सीएचसी आवंटन के नाम पर पहले सात हजार रुपये की मांग की, जिसे बाद में घटाकर पांच हजार रुपये कर दिया गया। परेशान होकर प्रशिक्षु ने एंटी करप्शन से शिकायत की, जिसके बाद ट्रैप टीम ने कार्रवाई की। इस कार्रवाई के बाद से सीएमओ कार्यालय में हड़कंप मचा हुआ है। सोमवार को टीम के दोबारा पहुंचने की सूचना मिलते ही कई कर्मचारी कार्यालय से बाहर निकल गए। टीम ने बंद कक्ष को खुलवाकर जांच की और कई कर्मचारियों से पूछताछ की। एंटी करप्शन प्रभारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि विवेचना के दौरान महिला लिपिक से पूछताछ में कुछ अन्य कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं। मामले की जांच जारी है और पुख्ता साक्ष्य मिलने पर आरोपियों की सूची में और नाम जोड़े जा सकते हैं।

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