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हाथरस 09 फरवरी । हाथरस जिले में भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जो भविष्य के लिए गंभीर संकट का संकेत है। जिले के सात विकास खंडों में से तीन को अतिदोहित (डार्क जोन) घोषित किया जा चुका है, जबकि कई अन्य ब्लॉक क्रिटिकल और सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में पहुंच गए हैं। प्रदेश में भूजल संचयन व रिचार्ज के लिए चयनित 12 जनपदों में हाथरस भी शामिल है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 से 2024 के बीच जिले के अधिकांश ब्लॉकों में मानसून से पहले और बाद के भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। सादाबाद ब्लॉक की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है, जहां वर्ष 2024 में मानसून से पूर्व भूजल स्तर 28.16 मीटर तक पहुंच गया, जो जिले में सबसे निचला स्तर है। वहीं हसायन ब्लॉक में स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर बनी हुई है, हालांकि वहां भी बीते वर्षों में गिरावट दर्ज की गई है।मुरसान और सासनी ब्लॉक लंबे समय से डार्क जोन की श्रेणी में हैं, जहां 100 प्रतिशत से अधिक भूजल दोहन हो रहा है। सहपऊ को वर्ष 2018 में गंभीर श्रेणी में रखा गया था। हाथरस ब्लॉक क्रिटिकल श्रेणी में है, जबकि सादाबाद और सिकंदराराऊ सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में शामिल हैं। जिले का हसायन ब्लॉक एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जहां भूजल दोहन 60 प्रतिशत से कम है। भूजल संकट से निपटने के लिए शासन द्वारा ‘जल संचयन जन-भागीदारी 2.0’ अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें 13 विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिले में 5,153 कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन अब तक केवल 395 कार्य ही पूरे हो सके हैं। इनमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग, जल संरक्षण और रिचार्ज से जुड़े कार्य शामिल हैं। मुख्य विकास अधिकारी पी.एन. दीक्षित ने बताया कि सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि जल संचयन से जुड़े कार्यों में तेजी लाई जाए, ताकि गिरते भूजल स्तर को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि मानसून के बाद कुछ क्षेत्रों में आंशिक सुधार जरूर होता है, लेकिन यह सुधार अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भूजल दोहन पर नियंत्रण और जल संचयन के कार्यों में तेजी नहीं लाई गई, तो आने वाले समय में जिले को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

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