
हाथरस 05 फरवरी । जनपद में जल संचय जन-भागीदारी 2.0 अभियान के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुत कार्ययोजनाओं की प्रगति की समीक्षा को लेकर मुख्य विकास अधिकारी पी.एन. दीक्षित की अध्यक्षता में विकास भवन कार्यालय में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में 01 जून 2025 से 31 मार्च 2026 की अवधि में पूर्ण कराए गए एवं प्रक्रियाधीन कार्यों का अनुश्रवण किया गया। बैठक के दौरान सहायक अभियंता लघु सिंचाई दीपक कुमार द्वारा संबंधित विभागों से प्राप्त प्रगति रिपोर्ट को पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। रिपोर्ट के अनुसार पोर्टल पर फीडिंग के अनुरूप कुल लक्ष्य 5153 कार्यों के सापेक्ष 315 कार्य पूर्ण तथा 76 कार्य प्रक्रियाधीन दर्शाए गए। लघु सिंचाई विभाग द्वारा अवगत कराया गया कि जल शक्ति अभियान – कैच द रेन के अंतर्गत निर्धारित 45 रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग के सापेक्ष सभी 45 कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं। इस पर सीडीओ ने निर्देश दिए कि पूर्ण कार्यों की पीपीटी एवं फोटोग्राफ भौतिक एवं वित्तीय विवरण सहित पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट किए जाएं।
भूमि संरक्षण विभाग द्वारा 03 तालाब एवं 100 मेड़बंदी के लक्ष्य के सापेक्ष केवल 02 तालाब पूर्ण तथा 01 तालाब प्रगति में बताया गया। इस पर सीडीओ ने अवशेष कार्यों को निर्धारित मानक व गुणवत्ता के अनुरूप शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। जल निगम (शहरी) के अंतर्गत 35 तथा जल निगम (ग्रामीण) के अंतर्गत 280 रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग के कार्य बजट के अभाव में लंबित बताए गए। सीडीओ ने निर्देशित किया कि बजट प्राप्त होते ही कार्य पूर्ण कर पीपीटी व फोटो सहित रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। नगर पालिका एवं नगर पंचायतों द्वारा प्रस्तुत कार्ययोजना के अनुसार 150 रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग एवं 80 सोक पिट के सापेक्ष केवल 05 रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग कार्य पूर्ण पाए गए। शेष कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) द्वारा 135 रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 02 कार्य पूर्ण होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए विकास खंड एवं ग्राम पंचायतवार विवरण तैयार कर कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। साथ ही सभी खंड विकास अधिकारियों को भी कार्ययोजना के अनुसार कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए। बैठक में कुछ विभागों की शत-प्रतिशत उपस्थिति न होने पर सीडीओ ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि आगामी बैठक में सभी विभाग पूर्ण सूचना के साथ अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें, अन्यथा कार्यों का सत्यापन एवं निरीक्षण उच्च अधिकारियों द्वारा कराया जाएगा। बैठक में वर्षा जल संचयन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि छोटे-छोटे प्रोजेक्ट बड़े प्रोजेक्ट की तुलना में भूजल रिचार्ज में अधिक प्रभावी होते हैं। भविष्य में अधिक से अधिक छोटे जल संचयन प्रोजेक्ट शामिल करने का निर्णय लिया गया। साथ ही गौशालाओं के आसपास बने गड्ढों, पेयजल टंकियों के ओवरफ्लो पानी के संचयन को भी योजना में शामिल करने पर सहमति बनी। बताया गया कि प्रदेश में भूजल स्तर में अत्यधिक गिरावट वाले 12 जनपदों में हाथरस भी शामिल है। ऐसे में वर्षा जल संचयन भविष्य की जल सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। अंत में सीडीओ द्वारा सभी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए बैठक का समापन किया गया।

















