
हाथरस 01 फरवरी । यूजीसी कानून और एससी-एसटी एक्ट को समाप्त करने की मांग को लेकर आज सवर्ण समाज के कुछ संगठनों ने आज भारत बंद का आह्वान किया था। इसी के तहत हाथरस में भी बाजार बंद रहे और सवर्ण समाज से जुड़े विभिन्न संगठनों ने प्रदर्शन किया। सुबह शहर के घंटाघर बाजार पर राष्ट्रीय सवर्ण परिषद, भारतीय परशुराम सेना, राष्ट्रवादी प्रताप सेवा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता एकत्रित हुए। इन संगठनों ने पहले ही व्यापारियों से प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील की थी। रविवार का दिन होने के कारण शहर की अधिकतर दुकानें और प्रतिष्ठान पहले से ही बंद थे। घंटाघर पर एकत्रित होकर इन लोगों ने नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। इसके बाद शहर के बाजारों में जुलूस निकालकर खुली हुई दुकानों और प्रतिष्ठानों को बंद कराया गया। इस दौरान कुछ स्थानों पर नोक-झोंक भी हुई। मौके पर भारी पुलिस बल भी मौजूद था। राष्ट्रीय सवर्ण परिषद के अध्यक्ष पंकज धवरैय्या ने कहा कि यह एक आंदोलन नहीं, बल्कि क्रांति है। उन्होंने यूजीसी कानून, एससी-एसटी एक्ट और जातीय आरक्षण को सवर्णों पर थोपा गया अभिशाप बताया। इसी के तहत आज बाजार बंदी हुई है। माल को बंद कराने को लेकर नोकझोंक भी हुई।
पंकज धवरैय्या ने जानकारी दी कि दिल्ली में 40 संगठनों ने बैठक कर भारत बंद का आह्वान किया था। आंदोलन के अगले चरण में सवर्ण स्वाभिमान पदयात्रा 7 फरवरी को हाथरस से दिल्ली जाएगी। राष्ट्रवादी प्रताप सेना के प्रदेश अध्यक्ष नितिन शेखावत ने यूजीसी के नए नियमों का विरोध करते हुए कहा कि जब तक केंद्र सरकार इन्हें वापस नहीं लेगी, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मोदी सरकार सवर्ण समाज की बात नहीं सुनेगी, तो उसे सत्ता से बेदखल कर दिया जाएगा। परशुराम सेना के प्रदेशाध्यक्ष राजेश कौशिक ने कहा कि मोदी सरकार को 2027 में सत्ता से उखाड़ फेंका जाएगा। शरद उपाध्याय नंदा ने भी सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग की, अन्यथा आंदोलन जारी रखने की बात कही। इधर, आज इस प्रदर्शन और बाजार बंद के दौरान खुफिया तंत्र भी अलर्ट रहा और बाजार में पुलिस फोर्स की तैनात रहा।
















