
हाथरस 26 जनवरी । गणतंत्र दिवस के अवसर पर “जिनका कोई नहीं, उनका अपनाघर” आश्रम में साहित्यिक संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में गरिमामय गणतंत्र समारोह आयोजित किया गया। ब्रज कला केन्द्र के अध्यक्ष चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के संयोजन में काका हाथरसी स्मारक समिति, राष्ट्रीय कवि संगम एवं संस्कार भारती के सहयोग से यह आयोजन सम्पन्न हुआ। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि अपनाघर आश्रम असहाय एवं निराश्रित व्यक्तियों के लिए शांति, सेवा और मानवीय संवेदना का केंद्र है। यहाँ पूर्णतः असमर्थ व्यक्तियों को “प्रभु” मानकर उनकी सेवा करना एक महान पुण्य कार्य है। आश्रम अध्यक्ष ने बताया कि कोई भी व्यक्ति यहाँ आकर प्रभुओं को भोजन करा सकता है। मात्र 5100 रुपये में 100 प्रभुओं के लिए भरपेट भोजन की व्यवस्था की जाती है। आश्रम न तो किसी प्रकार की सरकारी सहायता लेता है और न ही किसी से सहायता की मांग करता है, बल्कि प्रभु कृपा से दानदाता स्वयं आगे आकर सहयोग करते हैं। कार्यक्रम के दौरान कवियों एवं वक्ताओं के विचारों के बाद एक दिव्यांग प्रभु द्वारा प्रस्तुत भजन ने सभी को भावविभोर कर दिया। विशेष बात यह रही कि यह प्रभु न देख सकते हैं और न ही सुन सकते हैं, इसके बावजूद उनका भजन गायन उपस्थित जनों के लिए अद्भुत और प्रेरणादायक रहा। गणतंत्र दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण किया गया तथा राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर अपनाघर आश्रम के 85 प्रभुओं के साथ आश्रम अध्यक्ष दिलीप पोद्दार एडवोकेट, सचिव चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य, कार्यक्रम संचालक आशु कवि अनिल बौहरे, नवीन आजीवन सदस्य इन्द्रा जैसबाल, डॉ. प्रतिभा भारद्वाज, डॉ. अनु विमल, वीना गुप्ता, बाला शर्मा, चाहत शर्मा, कांता शर्मा, इच्छा माथुर, नीतू शर्मा, ओमप्रकाश गुप्ता, प्रदीप शर्मा, मुकेश शर्मा, श्याम बाबू चिंतन, पंडित हाथरसी, विजय चौहान, हजारी लाल, चमनेश राजपूत, अनिल अग्रवाल सहित अनेक साहित्यकार एवं समाजसेवी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में पंडित मुकेश शर्मा, ध्रुव सिंह, धनीराम, अभय चाहर सहित अन्य सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

















