
हाथरस 23 जनवरी । सेकसरिया सुशीला देवी पब्लिक स्कूल में पराक्रम दिवस एवं वसंत पंचमी का संयुक्त रूप से हर्षोल्लास और श्रद्धाभाव के साथ आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना एवं आराधना के साथ किया गया, जिससे संपूर्ण वातावरण विद्या, संस्कार एवं सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया। बसंत पंचमी के अवसर पर नन्हे-मुन्ने विद्यार्थी पीले रंग की आकर्षक पोशाक पहनकर उत्सव में सम्मिलित हुए तथा माँ सरस्वती की आराधना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। पीले वस्त्रों से संपूर्ण विद्यालय परिसर उल्लास, पवित्रता एवं नवचेतना के रंग में रंगा हुआ प्रतीत हुआ। पराक्रम दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन, संघर्ष, देशप्रेम एवं त्याग पर प्रभावशाली भाषण प्रस्तुत किए गए। बच्चों ने नेताजी के अदम्य साहस और राष्ट्रसेवा को आदर्श बताते हुए उनसे प्रेरणा लेने का संदेश दिया। वसंत पंचमी के महत्व पर भी विद्यार्थियों द्वारा विचार व्यक्त किए गए। बच्चों ने बताया कि यह पर्व विद्या, समृद्धि और नवसृजन का प्रतीक है। इस दिन नई फसल पककर तैयार होती है, प्रकृति में नए पत्तों का आगमन होता है तथा चारों ओर जीवन का नवसंचार होता है।
इस अवसर पर कक्षा 8 की छात्रा छवि वार्ष्णेय एवं अनाया शर्मा ने वसंत पंचमी के महत्व, सांस्कृतिक परंपरा एवं आध्यात्मिक पक्ष पर अपने विचार प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किए। वहीं दूसरी ओर कक्षा 8 की छात्रा गौरी भारद्वाज एवं लव्य गुप्ता ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन, संघर्ष, राष्ट्रभक्ति और नेतृत्व गुणों पर प्रेरणादायी भाषण देकर सभी को भावविभोर कर दिया। विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ. जी. डी. पाटिल जी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस के संघर्षपूर्ण जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “नेताजी का जीवन साहस, आत्मबल, अनुशासन,त्याग एवं राष्ट्रसेवा की सच्ची प्रेरणा देता है।” साथ ही उन्होंने वसंत पंचमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “यह पर्व प्रकृति के नवसृजन, कृषि समृद्धि एवं विद्या,कौशल की उपासना का प्रतीक है।” विद्यालय के सचिव गौरांग सेकसरिया जी ने अपने संदेश में कहा कि “ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक मूल्यों, नैतिक चेतना एवं भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि पराक्रम दिवस और वसंत पंचमी जैसे पर्व बच्चों को प्रेरणादायी व्यक्तित्वों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।” कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभक्ति, विद्या एवं संस्कारों को आत्मसात करने के संकल्प के साथ किया गया।