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हाथरस 22 जनवरी । “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा” और “दिल्ली चलो” जैसे ओजपूर्ण नारों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश की जनता की रग-रग में आज़ादी का जोश भर दिया था। कहा जाता है कि यदि किसी एक क्रांतिकारी से अंग्रेजी हुकूमत सबसे अधिक भयभीत हुई, तो वह थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस। “दिल्ली चलो” का ऐतिहासिक नारा भी सुभाष चंद्र बोस द्वारा ही दिया गया था। नेताजी ने न केवल आजाद हिंद फौज का गठन किया, बल्कि आजाद हिंद सरकार की स्थापना कर भारत की स्वतंत्रता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। बताया जाता है कि आजाद हिंद सरकार द्वारा जारी डाक टिकट भी प्रचलन में लाए गए थे, जो 1943 में जर्मनी में मुद्रित किए गए थे। इन डाक टिकटों को बाद में भारतीय डाक विभाग द्वारा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े डाक टिकटों की श्रेणी में शामिल किया गया।

सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक में हुआ था। वे वास्तव में मां भारती की आरती के अखंड और अविचल दीप थे। एक महान सेनापति, वीर सैनिक और कुशल राजनीतिज्ञ के रूप में नेताजी ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। आज भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान प्राप्त है। आजाद हिंद सरकार द्वारा जारी डाक टिकटों में चरखा चलाती महिला, खेत जोतता किसान, हथियार थामे सैनिक, घायल सैनिकों का उपचार करती नर्स तथा अखंड भारत का मानचित्र जैसे राष्ट्रप्रेरक चित्र अंकित हैं। ये दुर्लभ और ऐतिहासिक डाक टिकट डाक टिकट संग्रहकर्ता शैलेंद्र वार्ष्णेय सर्राफ के संग्रह में सुरक्षित हैं। हालांकि ये डाक टिकट अब अत्यंत दुर्लभ हो चुके हैं, लेकिन वे आज भी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की अमूल्य गवाही देते हैं। शैलेंद्र सर्राफ के संग्रह में स्वतंत्रता के बाद जारी हुए अन्य ऐतिहासिक डाक टिकट एवं सिक्के भी संरक्षित हैं, जो देश के गौरवशाली इतिहास को सहेजने का कार्य कर रहे हैं।

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