
सादाबाद 14 जनवरी । सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रधानमंत्री मातृत्व मेले का आयोजन किया गया। इस दौरान 45 गर्भवती महिलाओं को आयरन सुकोज की खुराक दी गई। मेले में गर्भवती और सामान्य महिलाओं को बीमारियों से बचाव और दवाओं के सेवन के बारे में जानकारी प्रदान की गई। इसी के साथ आयरन सुकोज सप्ताह का भी शुभारंभ हुआ। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दानवीर सिंह ने बताया कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं में रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी एक प्रमुख कारण है। गर्भावस्था के दौरान मां को अपने साथ-साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी रक्त के माध्यम से पोषण देना होता है, जिससे कई बार महिलाओं में खून की कमी हो जाती है। महिला चिकित्साधिकारी डॉ. स्वाति गर्ग ने आयरन सुकोज सप्ताह का शुभारंभ किया। उन्होंने जानकारी दी कि गर्भवती महिलाओं को एनीमिया से बचाने के लिए पहली तिमाही में 90 फोलिक एसिड की गोलियां तथा दूसरी और तीसरी तिमाही में 380 आयरन फोलिक एसिड की गोलियां उपलब्ध कराई जाती हैं। हीमोग्लोबिन 7 से कम होने पर गंभीर एनीमिया और 7 से 9.9 के बीच होने पर मध्यम एनीमिया की श्रेणी में रखा जाता है। सादाबाद सीएचसी पर प्रत्येक माह आयरन सुकोज सप्ताह चलाया जा रहा है। इसके तहत गंभीर और मध्यम एनीमिया से ग्रसित महिलाओं को अभियान के रूप में लाभान्वित किया जा रहा है। इस मेले में कुल 45 गर्भवती माताओं को आयरन सुकोज की पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी खुराक दी गई। चिकित्सकों ने हाई रिस्क प्रेगनेंसी के प्रमुख कारणों की भी जानकारी दी। इनमें रक्तस्राव, खून की कमी, गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप, पूर्व गर्भावस्था की जटिलताएं, अधिक प्रसव, मधुमेह, हृदय रोग, टीबी, मलेरिया जैसी बीमारियां, 15 वर्ष से कम अथवा 35 वर्ष से अधिक आयु में गर्भधारण, 145 सेंटीमीटर से कम कद तथा 35 किलोग्राम से कम वजन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, गर्भावस्था के दौरान खतरे के लक्षणों के बारे में भी बताया गया। यदि 24 घंटे से अधिक तेज बुखार, सिरदर्द व धुंधला दिखना, चक्कर या बेहोशी, शरीर व चेहरे पर सूजन, तेज धड़कन, सांस फूलना, पेट दर्द, योनि से रक्तस्राव या पानी आना, बच्चे की हलचल कम होना अथवा बंद होना तथा स्वयं या भ्रूण को नुकसान पहुंचाने के विचार आएं, तो तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करना चाहिए।













