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हाथरस 14 जनवरी । उच्चतम न्यायालय में सड़क के कुत्तों से संबंधित एक मामले में पारित अंतरिम आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता पौलोमी पाविनी शुक्ला ने प्रभावी पैरवी की। एडवोकेट शुक्ला ने न्यायालय के समक्ष बेज़ुबान जानवरों के लिए भावनात्मक नहीं बल्कि वैज्ञानिक और व्यावहारिक प्रबंधन प्रणाली अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सुनवाई के दौरान उन्होंने यह महत्वपूर्ण दलील भी रखी कि यदि कुत्तों के लिए बड़े पैमाने पर शेल्टर गृह बनाए जाने की योजना है, तो उससे पूर्व देश में मौजूद लगभग 3 करोड़ अनाथ बच्चों के लिए पर्याप्त अनाथालय, शिक्षा और संरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मानवीय संवेदनाओं का दायरा केवल पशुओं तक सीमित न रहकर समाज के सबसे उपेक्षित वर्ग अनाथ बच्चों तक भी पहुँचना चाहिए। गौरतलब है कि नगर के रामलीला ग्राउंड निवासी आईएएस प्रशांत शर्मा की पत्नी पौलोमी पाविनी शुक्ला सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता हैं और विगत एक दशक से अनाथ बच्चों के अधिकारों के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। उनके द्वारा दायर जनहित याचिकाओं के माध्यम से अनाथ बच्चों को आरक्षण सहित कई मौलिक अधिकार दिलाने का प्रयास किया गया है। हाल ही में उनकी एक जनहित याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने ऐतिहासिक आदेश पारित करते हुए अनाथ बच्चों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) के अंतर्गत सम्मिलित करने का निर्देश दिया है, जिसे बच्चों के अधिकारों के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त, पौलोमी पाविनी शुक्ला ने भारत में अनाथ बच्चों की दयनीय स्थिति पर आधारित एक पुस्तक “पृथ्वी के सर्वाधिक निःशक्त – भारत के अनाथ” भी लिखी है, जो नीति निर्धारकों और समाज को झकझोरने वाला दस्तावेज मानी जाती है। अनाथ बच्चों के हित में किए गए उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है।

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