
सादाबाद 13 जनवरी । क्षेत्र में कड़ाके की ठंड का प्रकोप जारी है। लगातार तीसरे दिन सुबह रबी की फसलों पर पाला जमने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। तापमान में गिरावट के कारण फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। सुबह तड़के सरसों, आलू, मटर और गेहूं जैसी रबी फसलों की पत्तियों पर बर्फ की सफेद परत देखी गई। पाले से फसलों की पत्तियां झुलसने लगती हैं, जिससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। लगातार पाले की मार से किसान परेशान हैं। उन्हें फसलों को बचाने के लिए दवाइयों के छिड़काव, सिंचाई और अन्य बचाव उपायों पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि यह स्थिति बनी रही, तो उनकी मेहनत और लागत दोनों प्रभावित होंगी। फसलों पर पाले के खतरे को देखते हुए किसान कृषि विशेषज्ञों से मार्गदर्शन ले रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पाले से बचाव के लिए फसलों में हल्की सिंचाई करना फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे तापमान संतुलित रहता है। इसके अतिरिक्त, सल्फर, पोटाश आधारित घोल या अन्य अनुशंसित दवाइयों का छिड़काव भी सहायक हो सकता है। कृषि विशेषज्ञ ललित कुलश्रेष्ठ ने पाले से बचाव के लिए रात को हल्की सिंचाई करने की सलाह दी। उन्होंने इंडोफिल के ‘शेयर’ उत्पाद का 500 मिलीलीटर प्रति एकड़ और ‘मोक्सीमेट’ का 600 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करने का सुझाव दिया। उनके अनुसार, इससे पौधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और आलू की फसल में पछेती झुलसा की संभावना 90% तक कम हो जाती है।

















