
हाथरस 12 जनवरी । करीब 160 वर्ष पुराने ऐतिहासिक हाथरस सिटी रेलवे स्टेशन के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मथुरा–कासगंज रेलखंड के दोहरीकरण की योजना में जगह की भारी कमी सामने आने के बाद रेलवे ने इस स्टेशन को शहर से बाहर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इससे शहर में चर्चाओं और चिंताओं का माहौल बन गया है। अंग्रेजी शासनकाल में वर्ष 1865 के आसपास स्थापित हाथरस सिटी स्टेशन का इतिहास बेहद समृद्ध रहा है। बीते 25 वर्षों में यात्रियों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ और यह स्टेशन शहर की जीवनरेखा बन गया। वर्ष 2009 में मीटर गेज से ब्रॉड गेज परिवर्तन और 2019 में विद्युतीकरण के बाद स्टेशन का महत्व और बढ़ गया। हालांकि अब दोहरीकरण योजना के दौरान सबसे बड़ी बाधा जगह की बन गई है। स्टेशन के एक ओर बागला इंटर व डिग्री कॉलेज का विशाल मैदान और दूसरी ओर मथुरा–बरेली राजमार्ग होने के कारण अतिरिक्त ट्रैक बिछाने की कोई गुंजाइश नहीं बची है। इसी कारण विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में हाथरस सिटी स्टेशन को हटाकर मथुरा रोड पर भगवंतपुर के पास करीब तीन किलोमीटर दूर न्यू हाथरस सिटी स्टेशन बनाए जाने का प्रस्ताव शामिल किया गया है।
अमृत भारत योजना में हुआ था हाल ही में कायाकल्प
वर्ष 2025 में हाथरस सिटी स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत करीब 3.5 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया था। प्लेटफॉर्म, प्रतीक्षालय, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और यात्री सुविधाओं को आधुनिक बनाया गया, जिससे यात्रियों को काफी राहत मिली थी।
स्वामी विवेकानंद से भी जुड़ा है स्टेशन का इतिहास
हाथरस सिटी स्टेशन का ऐतिहासिक महत्व आध्यात्मिक दृष्टि से भी रहा है। वर्ष 1888 में स्वामी विवेकानंद के यहां ठहरने और तत्कालीन स्टेशन मास्टर शरतचंद्र गुप्ता को अपना पहला शिष्य बनाने की घटना का उल्लेख श्रीरामकृष्ण परमहंस मठ की पुस्तकों में मिलता है।
रेलवे अधिकारियों का बयान
इज्जतनगर मंडल के वरिष्ठ मंडलीय वाणिज्य प्रबंधक संजीव कुमार शर्मा ने बताया कि मथुरा–कासगंज रेलखंड के दोहरीकरण की डीपीआर अंतिम चरण में है। वहीं अपर मंडल रेल प्रबंधक मनोज कुमार के अनुसार दो स्टेशन एक साथ वर्किंग में नहीं रह सकते। भविष्य में न्यू हाथरस सिटी स्टेशन ही प्राइम स्टेशन होगा, जबकि मौजूदा स्टेशन को पहले हॉल्ट और बाद में पूरी तरह बंद किया जा सकता है।
यात्रियों और व्यापारियों में चिंता
हाथरस सिटी स्टेशन से प्रतिदिन करीब 7 हजार यात्री सफर करते हैं। यहां से 5 जोड़ी पैसेंजर और लगभग 12 एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन होता है। स्टेशन बंद होने की स्थिति में यात्रियों को मथुरा रोड स्थित नए स्टेशन तक जाना होगा, जिससे बुजुर्गों, छात्रों और दैनिक यात्रियों को परेशानी हो सकती है। व्यापारियों को भी शहर की रौनक प्रभावित होने का डर सता रहा है।
क्या बदलेगी शहर की तस्वीर?
रेलवे बोर्ड पहले ही 65 किलोमीटर लंबे कासगंज–मथुरा रेलखंड के दोहरीकरण को सैद्धांतिक स्वीकृति दे चुका है। अब डीपीआर को अंतिम मंजूरी मिलते ही हाथरस शहर की रेल व्यवस्था और शहरी स्वरूप में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है।



















