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हाथरस 12 जनवरी । लाजवाब स्वाद और बेहतर गुणवत्ता की पहचान बनाए 3797 और सूर्या किस्म के आलू रूस की अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशाला में सभी मानकों पर खरे उतर गए हैं, जिसके बाद रूस ने बिना किसी शर्त के इनके आयात को मंजूरी दे दी है। हालांकि चिप्सोना किस्म का सैंपल फेल हो गया। एपिडा के चेयरमैन अभिषेक देव ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि अब देश से बड़े पैमाने पर आलू का निर्यात संभव हो गया है। इसका लाभ हाथरस के साथ-साथ आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, मथुरा, एटा, कन्नौज, फर्रूखाबाद और कानपुर जिलों के किसानों को मिलेगा। हाथरस को 3797 किस्म के करीब चार लाख पैकेट का ऑर्डर मिला है, जिसकी पहली खेप अप्रैल में सादाबाद क्षेत्र से भेजी जाएगी और सितंबर तक निर्यात जारी रहेगा। जिला उद्यान अधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि वर्ष 2019 से हाथरस से आलू निर्यात के प्रयास किए जा रहे हैं और अब रूस से इसकी शुरुआत हो रही है। निर्यात बढ़ने से किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे, मंडी और कोल्ड स्टोरेज का दबाव घटेगा तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीधी पहुंच बनेगी। किसानों ने बताया कि मौजूदा समय में मंडियों में आलू की आवक बहुत ज्यादा है, इसके सापेक्ष खरीद सीमित होने से उन्हें औने-पौने दामों पर फसल बेचनी पड़ रही है। जो किसान फसल नहीं बेच रहे हैं, वे कोल्ड स्टोर का सहारा ले रहे हैं, जहां किराया और ब्याज दर उन्हें परेशान कर रही है। निर्यात शुरू होने से यह दबाव कम होगा। हाथरस से पहली बार वर्ष 2019 में पहली बार 3797 आलू 25 हजार मीट्रिक टन आलू ईरान भेजा गया था। उस दौरान आलू की कीमतें 2100 रुपये प्रति पैकेट तक पहुंच गई थी। इस समय यूपी से ईरान, बहरीन, अरब अमीरात, जर्मनी, न्यूजीलैंड, अमीरात, जर्मनी, न्यूजीलैंड और नेपाल आलू भेजा जा रहा है। अलीगढ़ से भी आलू तेहरान, बहरीन, अमेरिका और गुयाना भेजा जा रहा है।

 

 

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