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हाथरस 10 जनवरी । रिटायरमेंट के बाद नियमित आमदनी के लिए बड़ी संख्या में सीनियर सिटीजन बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करते हैं, लेकिन FD से मिलने वाले ब्याज पर बैंक द्वारा टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) काट लिया जाता है, जिसे लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति रहती है। नगर के युवा चार्टर्ड अकाउंटेंट शुभांशु खंडेलवाल ने हमारा हाथरस को इस विषय में महत्वपूर्ण जानकारी दी।उन्होंने सीनियर सिटीजन को सलाह दी कि वे FD में निवेश करते समय सही योजना बनाएं और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से परामर्श लें, ताकि अनावश्यक TDS कटौती से बचा जा सके और कर नियमों का सही तरीके से पालन हो।

उन्होंने बताया कि TDS कोई अलग टैक्स नहीं होता, बल्कि यह अग्रिम रूप से काटा गया टैक्स होता है, जिसे बाद में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय क्लेम किया जा सकता है। वर्तमान नियमों के अनुसार, यदि किसी सीनियर सिटीजन को एक बैंक या पोस्ट ऑफिस की FD से पूरे वित्तीय वर्ष में 1 लाख रुपये तक का ब्याज मिलता है, तो उस पर बैंक TDS नहीं काटता। लेकिन जैसे ही यह ब्याज 1 लाख रुपये से अधिक हो जाता है, बैंक TDS काटना शुरू कर देता है, जब तक कि फॉर्म 15H जमा न किया गया हो।

चार्टर्ड अकाउंटेंट शुभांशु खंडेलवाल ने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि FD पर ब्याज दर लगभग 8 प्रतिशत है, तो एक बैंक में करीब 12 से 13 लाख रुपये जमा करने पर सालाना ब्याज लगभग 1 लाख रुपये बनता है और इस स्थिति में कोई TDS नहीं कटता। वहीं, यदि निवेश राशि बढ़ने से ब्याज 1 लाख रुपये से ऊपर चला जाता है, तो TDS कटेगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई सीनियर सिटीजन दो अलग-अलग बैंकों में FD कराता है और हर बैंक से मिलने वाला ब्याज 1 लाख रुपये से कम है, तो किसी भी बैंक द्वारा TDS नहीं काटा जाएगा, भले ही कुल ब्याज आय 1 लाख रुपये से ज्यादा क्यों न हो। उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति को एक बैंक से 90 हजार रुपये और दूसरे बैंक से 80 हजार रुपये ब्याज मिलता है, तो कुल ब्याज 1.70 लाख रुपये होने के बावजूद TDS नहीं कटेगा, क्योंकि किसी एक बैंक में 1 लाख की सीमा पार नहीं हो रही है।

फॉर्म 15H के बारे में जानकारी देते हुए शुभांशु खंडेलवाल ने बताया कि यह एक घोषणा पत्र होता है, जिसे सीनियर सिटीजन बैंक में जमा कर सकते हैं, ताकि FD के ब्याज पर TDS न काटा जाए। हालांकि, यह फॉर्म तभी मान्य होता है, जब संबंधित व्यक्ति की कुल टैक्स योग्य आय पर वास्तविक रूप से कोई टैक्स देय न बनता हो। यदि कुल आय टैक्स छूट की सीमा से अधिक है, तो केवल फॉर्म 15H भरने से टैक्स से बचा नहीं जा सकता।

 

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