
मुंबई 08 जनवरी । भारतीय शेयर बाजार में पिछले चार कारोबारी सत्रों से जारी भारी बिकवाली ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। बीएसई सेंसेक्स इस अवधि में 1,580 अंकों से अधिक टूट चुका है, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 1.7 प्रतिशत गिरकर 25,900 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया है। इस गिरावट के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 7.19 लाख करोड़ रुपये घटकर 474 लाख करोड़ रुपये रह गया है। आज 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 780.18 अंक या 0.92 प्रतिशत गिरकर 84,180.96 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 263.90 अंक या 1.01 प्रतिशत गिरकर 25,876.85 के स्तर पर बंद हुआ।
गिरावट के प्रमुख कारण
1. ट्रंप की टैरिफ चेतावनी और रूसी तेल विवाद
अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव से बाजार में घबराहट बढ़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल आयात को लेकर भारत पर दबाव बढ़ाया है। अमेरिका रूसी आयात पर 500% तक शुल्क लगाने वाले विधेयक पर विचार कर रहा है, जिसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है। इससे भारतीय निर्यात पर अतिरिक्त टैरिफ की आशंका जताई जा रही है।
2. दिग्गज शेयरों में भारी बिकवाली
रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक जैसे हेवीवेट शेयरों में इस सप्ताह करीब 4 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार यह गिरावट फंडामेंटल से ज्यादा तकनीकी और सेटलमेंट कारणों से हुई है।
3. सेक्टोरल दबाव
मेटल इंडेक्स में 1.9 प्रतिशत और आईटी इंडेक्स में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। रिटेल सेक्टर में भी प्रतिस्पर्धा बढ़ने से दबाव बना रहा।
4. वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव
वेनेजुएला संकट और वैश्विक अनिश्चितता के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कमजोरी रही। जापान का निक्केई 1.2 प्रतिशत और चीन का सीएसआई 300 इंडेक्स 0.8 प्रतिशत गिरा।
5. घरेलू विकास दर को लेकर चिंता
हालांकि एनएसओ ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 7.4 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया है, लेकिन रेटिंग एजेंसियों का मानना है कि साल की दूसरी छमाही में विकास दर धीमी हो सकती है। अमेरिकी टैरिफ और सरकारी पूंजीगत व्यय में संभावित कमी इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
6. निवेशकों में अनिश्चितता
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार फिलहाल दिशाहीन (नॉन-डायरेक्शनल) बना हुआ है। जब तक बाजार प्रमुख प्रतिरोध स्तरों को पार नहीं करता, तब तक सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार की चाल वैश्विक संकेतों और अमेरिकी नीतियों पर निर्भर करेगी।




















