
हाथरस 08 जनवरी । शहर के सर्कुलर रोड स्थित बलकेश्वर महादेव पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के षष्ठम दिवस में कथा व्यास जगतगुरु द्वाराचार्य अग्रपीठाधीश्वर मलूक पीठाधीश्वर स्वामी श्री राजेंद्र दास जी महाराज के परम स्नेही शिष्य रसराज दास जी महाराज ने रुक्मिणी-कृष्ण विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा में बताया गया कि विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी अत्यंत रूपवती और बुद्धिमान थीं तथा उन्होंने श्रीकृष्ण के गुण, कीर्ति और लीलाओं को सुनकर मन ही मन उन्हें अपना पति मान लिया था, जबकि उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह श्रीकृष्ण के विरोधी शिशुपाल से तय कर दिया। इस निर्णय से व्यथित रुक्मिणी ने अपनी सखी के माध्यम से ब्राह्मण सुदेव के हाथ श्रीकृष्ण को पत्र भेजकर उनसे आग्रह किया कि वे आकर उन्हें स्वीकार करें, अन्यथा वे प्राण त्याग देंगी। पत्र मिलते ही श्रीकृष्ण विदर्भ पहुंचे और शिशुपाल की बारात आने से पूर्व ही रुक्मिणी का हरण कर लिया। इस दौरान रुक्मी ने सैनिकों सहित श्रीकृष्ण का पीछा किया, किंतु घमासान युद्ध में श्रीकृष्ण विजयी हुए और रुक्मिणी को द्वारका ले जाकर विधिपूर्वक विवाह किया। कथा व्यास ने कहा कि यह विवाह प्रेम और भक्ति का अनुपम प्रतीक है तथा इसी विवाह से प्रद्युम्न का जन्म हुआ, जिन्हें कामदेव का अवतार माना जाता है। उन्होंने कहा कि तुलसी और चंदन से प्रेम होना ही सच्चे ब्रजवासी की पहचान है। आयोजकों ने बताया कि सप्तम दिवस की कथा में दोपहर 2 बजे से सुदामा चरित्र लीला प्रारंभ होकर हरि इच्छा तक संपन्न होगी। कथा आयोजन की व्यवस्थाओं में प्रेमचंद वर्मा, किशोरीरमन वर्मा, प्रवीन वार्ष्णेय, राधारमण वर्मा, राजू लाला, ओमप्रकाश वर्मा, राजकुमार वर्मा, महेश वर्मा, दिलीप वर्मा, बिंटू वर्मा, श्रीनाथ, अमित, बिपिन, विशाल, तरुण, अंकित, अरुण, गोपाल, राम वर्मा, टिंकू वर्मा, योगेश वर्मा, दाऊजी वर्मा, सचिन वर्मा, दाऊदयाल वर्मा, कृष्णा, बिपिन कांत, मनोज वार्ष्णेय, प्रवीण वार्ष्णेय, अमरप्रकाश वार्ष्णेय, राजू वार्ष्णेय, अरुण अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, चिराग, गुड्डा, मुकेश शर्मा, अमन बागला, अंशु वर्मा, मनोज वर्मा, कान्हा, सुमित कुलवाल सहित अनेक श्रद्धालु सक्रिय रूप से जुड़े रहे।




















