सादाबाद 05 जनवरी । मौसम की मार से जहां जनजीवन लाचार है, वहीं गिरता पारा किसानों की भी धड़कन बढ़ा रहा है। ऐसे में स्थानीय कृषि विशेषज्ञ ललित कुलश्रेष्ठ ने आलू की फसल के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। इससे फसलों को पाले, ठंड से बचाया जा सकता है।
शाम के समय हल्की सिंचाई करें, जिससे मिट्टी गर्म होकर भाप छोड़े और आसपास का तापमान बढ़े। रात में खेत के मेड़ों पर गोबर, सूखी लकड़ी या पराली जलाकर धुआं करें, यह पाले की परत को बनने से रोकता है। पुआल या प्लास्टिक शीट से मिट्टी और पौधे को ढकें, यह जड़ों को ठंड से बचाता है। लकड़ी या गोबर के उपले की राख छिड़कने से गर्मी मिलती है और फफूंद से बचाव होता है। प्रतिष्ठित कृषि उत्पाद कंपनी इंडोफिल के अधिकारी ने बताया कि पाले से फसल को बचाने के लिए दवाइयों और पोषक तत्वों का प्रयोग भी उपयोगी रहता है। 2-3 ग्राम सल्फर प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव किया जा सकता है। पौधों की ठंड सहने की क्षमता बढ़ाने के लिए पोटाश का प्रयोग करें। झुलसा रोग से बचाव के लिए मैंकोजेब (0.2% घोल) का छिड़काव करें, पत्तियों के ऊपर-नीचे दवा पहुंचाएं। इसके अलावा ध्यान रखें कि फसलों के लिए खरपतवार नियंत्रण भी जरूरी है। सुबह धूप के लिए खेत से खरपतवार को साफ करे। फसल की नियमित निगरानी करें, पीले धब्बे या मुरझाने के लक्षण दिखें तो तुरंत उपाय करें। रसायनों के प्रयोग से पहले कृषि विशेषज्ञ की सलाह ज़रूर लें।


















