
हाथरस 04 जनवरी । सावन कृपाल रूहानी मिशन के बैनर तले कृपाल आश्रम गौशाला मार्ग पर नये वर्ष 2026 के प्रथम सप्ताह के पहले रविवार को एक भव्य आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया गया। मिशन के प्रमुख एवं विश्वविख्यात आध्यात्मिक सतगुरु परम पूज्य संत राजिंदर सिंह जी महाराज ने ऑडियो-वीडियो माध्यम से संगत को दर्शन प्रदान करते हुए नववर्ष की शुभकामनाएं दीं और सभी के सुखी, शांत व प्रसन्न जीवन की कामना की।
अपने संदेश में महाराज जी ने संगत को अंतरमुखी होकर आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य बाहरी संसार में जीवन व्यतीत करते हुए अपने भीतर छिपे रूहानी खजानों की खोज किए बिना ही इस दुनिया से चला जाता है। जब हम सही रूप से अंतरमुखी होते हैं, तब हमें अपने भीतर ही प्रभु के स्वरूप के दर्शन होने लगते हैं। महाराज जी ने समझाया कि प्रभु प्रेम के भंडार और चेतनता के महासागर हैं, और चूंकि आत्मा प्रभु का ही अंश है, इसलिए आत्मा भी प्रेम से परिपूर्ण है। सतगुरु द्वारा बताए गए मार्ग पर चलकर आत्मा को परमात्मा से एकमेक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब किसी पूर्ण महापुरुष की शरण मिलती है, तो वह हमें ‘नाम’ की देन देकर प्रभु प्राप्ति के सच्चे मार्ग से जोड़ देता है। इस अवसर पर आश्रम परिसर में छोटे बच्चों के लिए बाल सत्संग का भी आयोजन किया गया। साथ ही आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक एवं एलोपैथिक डिस्पेंसरी लगाई गई, जिसमें जरूरतमंद लोगों का उपचार योग्य चिकित्सक श्री मनोज अरोड़ा द्वारा किया गया। सत्संग के समापन पर सभी संगत के लिए लंगर प्रसादी का वितरण भी किया गया।
पिछौती शाखा में भी विशेष सत्संग
वहीं सावन कृपाल रूहानी मिशन की पिछौती शाखा में भी इसी अवसर पर विशेष सत्संग का आयोजन किया गया, जिसमें परम पूज्य संत राजिंदर सिंह जी महाराज ने वीडियो माध्यम से दर्शन एवं पावन प्रवचन दिए। महाराज जी ने कहा कि आधुनिक युग में भी आध्यात्मिक जागृति उतनी ही आवश्यक है जितनी प्राचीन काल में थी। उन्होंने ध्यान-अभ्यास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मेडिटेशन के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर की दिव्य शक्ति से जुड़ सकता है और जीवन के तनावों से मुक्ति पा सकता है। महाराज जी ने शाकाहार, पवित्र जीवन और सुमिरन पर विशेष बल देते हुए कहा कि इन्हीं साधनों से आत्मा अपने मूल स्रोत परमात्मा में विलीन हो सकती है। इस रूहानी मार्गदर्शन से उपस्थित संगत गहराई से प्रभावित हुई और सत्संग स्थल पर भक्ति एवं शांति का वातावरण व्याप्त रहा।















