Hamara Hathras

Latest News

हाथरस 03 जनवरी । गेहूं की फसल में यूरिया और डीएपी के साथ-साथ बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व का प्रबंधन बंपर पैदावार के लिए अनिवार्य है। कृषि विज्ञान केंद्र हाथरस के विशेषज्ञ डॉ. बलवीर सिंह के अनुसार, बोरॉन की कमी से गेहूं के उत्पादन में 20 से 30% तक की कमी आ सकती है। इसकी कमी होने पर पौधे की ऊपरी पत्तियां मुड़ने लगती हैं और बालियां बांझ रह जाती हैं, यानी उनमें दानों की जगह केवल ‘भूसा’ भर जाता है। जो दाने बनते भी हैं, वे पिचके और चमकहीन होते हैं, जिससे बाजार में उचित दाम नहीं मिल पाता। बोरॉन का मुख्य कार्य परागण में मदद करना और पत्तियों में बनी शर्करा को दानों तक पहुँचाना है, जिससे दाना मोटा, वजनदार और प्राकृतिक चमक युक्त बनता है। इसके वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए किसान भाई बुवाई के समय 4-5 किलो बोरैक्स प्रति एकड़ मिट्टी में मिलाएं। यदि खड़ी फसल में छिड़काव करना हो, तो 20% बोरॉन की 1 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर (150-200 ग्राम प्रति एकड़) पहला स्प्रे ‘झंडा पत्ता’ अवस्था और दूसरा ‘फूल आने’ के समय करें। इस संतुलित पोषण से न केवल दानों की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि किसानों को मंडी में अपनी उपज का सबसे ऊंचा भाव भी मिलेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts

You cannot copy content of this page