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लखनऊ 29 नवम्बर। भारत सरकार किसानों को हर तरह की सुविधा फसलोत्पादन के लिए दे रही है। देश के प्रधानमंत्री जी ने किसान ऊर्जा सुरक्षा और उत्थान महाअभियान यानी कुसुम योजना का ऐलान किया था। जिसके अन्तर्गत किसानों को अपनी भूमि पर सौर ऊर्जा से संचालित नलकूप लगाने हेतु अनुदान दिये जाने की व्यवस्था है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में इस योजना को लागू करते हुए किसानों को लाभान्वित किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को खेतों में फसलों की सिंचाई के लिए सोलर पम्प स्थापित कराए जाने का प्राविधान किया गया है।
प्रदेश सरकार की कुसुम योजना से बिजली की समस्या एवं किसानों की बिजली पर निर्भरता भी दूर हो रही है। प्रदेश के किसान अपनी खाली व बंजर पड़ी जमीन का इस्तेमाल सौर ऊर्जा के लिए कर सकते हैं। किसान सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली को बेच कर अतिरिक्त आमदनी भी कर सकते हैं। कुसुम योजना के अंतर्गत केन्द्र एवं प्रदेश सरकार मिल कर किसानों को अनुदान के रूप में सोलर पम्प की कुल लागत का 60 प्रतिशत दे रहे हैं। इस योजना के संचालन के लिए कृषि विभाग नोडल विभाग नामित है।

भारत सरकार के मिनिस्ट्री आफ न्यू एण्ड रिन्यूवेबल एनर्जी के निर्देशानुसार विभिन्न क्षमता के 7.5 एचपी तक के स्टैण्ड एलोन सोलर पम्प की स्थापना पर सरकार 30 फीसदी केन्द्रांश एवं 30 फीसदी राज्यांश के रूप में कुल 60 फीसदी अनुदान की व्यवस्था की है। लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देश पर प्रदेश सरकार ने राज्यांश बढ़ा कर गाइडलाइन में दिए गए निर्देशानुसार 2 एचपी और 3 एचपी के सोलर पम्प पर अनुदान 30 प्रतिशत से अधिक दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार की संचालित इस योजनान्तर्गत 1800 वाट 2 एचपी० डीसी सरफेस सोलर पम्प के लिए किसान को 28376 रूपये देना होगा। 3000 वाट 3 एचपी० डीसी सरफेस सोलर पम्प के लिए किसानों को 38,882 रूपये तथा 4800 वाट 5 एचपी० एसी समर्सिबल सोलर पम्प के लिए किसानों को 87020 रूपये देना होगा शेष धनराशि सरकार दे रही है। इस योजनान्तर्गत पम्प के लिए इच्छुक किसान “पहले आओ-पहले पाओष् की तर्ज पर सोलर पम्प के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। पी०एम० कुसुम योजनान्तर्गत अब तक 93062 सोलर पम्पों की स्थापना कराई जा चुकी है। इससे किसानों को सिंचाई व अन्य विद्युत उपयोग हेतु सुविधा मिल रही है। चालू वर्ष में भी हजारों सोलर पंप की स्थापना की जा रही है। सोलर पंप लगने से लगभग 1.50 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचन क्षमता में बढ़ोतरी हुई है। प्रतिवर्ष लगभग 5484 लाख यूनिट बिजली की बचत और कार्बन उत्सर्जन में प्रतिवर्ष 1.26 लाख टन की कमी आ रही है। इसके अलावा डीजल पंप सेट को सोलर पंप में परिवर्तित करने से हर साल लाखों लीटर डीजल की बचत हो रही है। प्रदेश के किसानों के फसल उत्पादन में सिंचाई हेतु सोलर पम्प बहुत ही सहायक सिद्ध हो रहे हैं।

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