हाथरस 30 अगस्त । अधिवक्ता मदन मोहन गौड़ ने जिलाधिकारी को एक पत्र भेजकर प्रस्तावित सर्किल रेट सूची के संबंध में आपत्ती एवं सुझाव दिए हैं। अधिवक्ता ने कहा कि विगत काफी वर्षों से प्रत्येक वर्ष सर्किल रेट सूची में 10% से 25% की वृद्धि होती है। इस प्रकार सर्किल रेट का चक्रवृद्धि करना न्याय संगत नहीं है। जबकि शासन की मंशा के अनुसार मूल्यांकन सूची का प्रत्येक साल पुनरीक्षण करना होता है। ना कि मूल्यांकन सूची में प्रत्येक साल पृष्ठ एक से लेकर अंतिम तक हर स्थान पर वृद्धि की जाती है।
उन्होंने आगे कहा कि सर्किल रेट सूची के पुनरीक्षण करने में संपत्ति के मूल्यांकन करने से उस स्थान की आवासीय व व्यापारिक गतिविधियां वहां पर रहने वालों का स्टेटस पर ध्यान देना होता है। उदाहरण के लिए यदि किसी भी बाजार में सर्राफा, आभूषण व जेवरात का कार्य होता है तो इस बाजार के बराबर जहां पर परचून की दुकान का कार्य होता है तो एक बाजार से दूसरा बाजार मिले होने पर एक समान रेट का करना न्यायोचित नहीं है। किंतु प्रस्तावित सर्किल रेट सूची में किसी प्रकार जो सेगमेंट जो बाजारों के दिए हैं, उन सब में अधिकांशत एक ही रेट लागू किया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सर्किल रेट सूची में प्रत्येक कॉलोनी में 10 से 15% की वृद्धि की गई है। जबकि प्रत्येक साल लेनदेन का मूल्य नहीं बढ़ पाता है। यदि राजस्वहित में फिर भी दर यदि बढ़ानी आवश्यक हो तो तीन से चार प्रतिशत की वृद्धि पर्याप्त होगी।
उन्होंने कहा कि हाथरस देहात का क्षेत्र अत्यधिक बड़ा है। किंतु सर्किल रेट सूची में यहां रास्ता डाबर व पेवर ब्लॉक व आरसीसी की सड़क तथा कच्चा रास्ता का भी एक ही रेट का होना न्यायोचित नहीं है। उदाहरण के लिए हाथरस देहात में ग्राम ढकपुरा से दादनपुर जो कि ईंट भट्टा के लिए रास्ता कच्चा रोड होने पर भी वहां पर प्रस्तावित सर्किल रेट सूची में 10,700 प्रति वर्ग मीटर है, जबकि वहां पर बाजारी कीमत 5000 से 5500 वर्ग मीटर है। वहां पर कच्चा रोड होने के कारण जलभराव रहता है तथा उस स्थान की भूमि का क्रय विक्रय नहीं हो पता है। अधिवक्ता ने कहा कि प्रार्थी की स्वयं की भूमि करीब 1300 वर्ग गज मौजूद है। सन 2016 से अब तक विक्रय नहीं हो पा रही है। यहां का रेट बाजारी कीमत के आधार पर व स्वयं स्थल निरीक्षण करके नियत करना उचित होगा।
उन्होंने कहा कि हाथरस नगर के पुराने शहर हाथरस पर निबंधन अधिकारी व स्टांप अधिकारी व उच्च अधिकारियों की हमेशा से कृपा रही है। शहरी क्षेत्र में सबसे अधिक स्टांप की चोरी होती है। उदाहरण के लिए पुराने शहर बसावट जो गलियों में जिनकी चौड़ाई मात्र 3 फुट से लेकर अधिकतम 10 या 12 फुट की है, यहां पर सर्किल रेट वर्तमान में 13,500 प्रस्तावित है।
उन्होंने आगे कहा कि शहर के मुख्य बाजारों में वाणिज्य दर सेगमेंट होने पर प्रस्तावित निर्मित दुकान की कीमत 1,02,000 प्रति वर्ग मीटर है। माना कि दुकान क्षेत्रफल 8 × 10 फुट अर्थात 7.43 वर्ग मीटर से कीमत मात्र 758000 होती है। जबकि बाजारी कीमत 40 से 70 लाख रुपए है। यहां वृद्धि करना न्याय उचित होगा।
अधिवक्ता मदन मोहन गौड़ ने कहा कि शहर से बाहर कॉलोनी व ग्रामीण क्षेत्र में चक्रवर्ती दर बढ़ाकर शहरी क्षेत्र में स्टांप वृद्धि न्यायté हित व राजस्व हित में बढ़ाना उचित रहेगा।
इस दौरान अध्यक्ष प्रमोद गोस्वामी, सचिव जमुना प्रसाद शर्मा एवं मीडिया प्रभारी शशांक पचौरी मौजूद रहे।