
हाथरस 07 नवंबर। कार्तिक मास के पावन अवसर पर मनाए जाने वाले पांच दिवसीय शरद सनातनी उत्सव के अंतर्गत गोवर्धन पूजा एवं भैया दूज के पर्व को लेकर पूजा-अर्चना, आरती और वंदन के शुभ मुहूर्त की जानकारी दी गई है। पंचांग के अनुसार गोवर्धन पूजा 10 नवंबर 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे से प्रारंभ होकर 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे तक रहेगी। 10 नवंबर को सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि विद्यमान होने के कारण उदया तिथि के अनुसार गोवर्धन पूजा इसी दिन की जाएगी। गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:40 बजे से 8:50 बजे तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि 2 घंटे 10 मिनट है। इसके अलावा शाम को गौधूलि मुहूर्त 5:30 बजे से 5:56 बजे तक रहेगा, जिसे पूजा के लिए अति शुभ माना गया है। श्री वेद भगवान सनातन धर्म सभा अध्यक्ष डॉ जितेंद्र स्वरुप शर्मा ने सभी जनपदवासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं ।
11 नवंबर को मनाई जाएगी भैया दूज, दोपहर 1:10 से 3:20 बजे तक तिलक का मुहूर्त
भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक भैया दूज का पर्व 11 नवंबर 2026, बुधवार को मनाया जाएगा। इसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 10 नवंबर को दोपहर 12 बजे से प्रारंभ होकर 11 नवंबर को दोपहर 3:53 बजे तक रहेगी। 11 नवंबर को उदया तिथि में द्वितीया विद्यमान रहने के कारण भैया दूज का पर्व इसी दिन मनाया जाएगा। भाई को तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:10 बजे से 3:20 बजे तक रहेगा। इसकी कुल अवधि 2 घंटे 10 मिनट है।
यमराज और यमुना से जुड़ी है भैया दूज की पौराणिक मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मृत्यु के देवता यमराज अपनी बहन यमुना के निमंत्रण पर उनके घर पहुंचे थे। यमुना ने अपने भाई का आदर-सत्कार किया और उनके माथे पर तिलक लगाकर स्वादिष्ट भोजन कराया। बहन के इस प्रेम और आतिथ्य से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान मांगने को कहा। इस पर यमुना ने वरदान मांगा कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा और भोजन ग्रहण करेगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। यमराज ने तथास्तु कहकर यह वरदान प्रदान किया। इसी मान्यता के चलते भैया दूज पर बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु, सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना करती हैं। इस दिन भाई-बहन द्वारा एक साथ यमुना नदी में स्नान करने की भी विशेष धार्मिक मान्यता है। मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और भाई-बहन के प्रेम का बंधन और मजबूत होता है।







