
हाथरस 16 अक्टूबर । महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान, स्वावलंबन और सशक्तिकरण के उद्देश्य से चलाए जा रहे मिशन शक्ति फेज-6.0 अभियान के अंतर्गत 16 अक्टूबर 2026 को थाना साइबर क्राइम में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं कु० मोनिका एवं कु० रागिनी को एक दिवसीय थानाध्यक्ष बनाया गया। पुलिस अधीक्षक हाथरस श्री चिरंजीव नाथ सिन्हा के निर्देशन तथा अपर पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्राधिकारी साइबर के पर्यवेक्षण में आयोजित इस पहल का उद्देश्य बालिकाओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने के साथ-साथ उन्हें पुलिस की कार्यप्रणाली से परिचित कराना रहा। एक दिवसीय थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाते हुए दोनों छात्राओं ने थाना साइबर क्राइम पर पहुंचे फरियादियों की समस्याओं और साइबर ठगी से संबंधित शिकायतों को गंभीरतापूर्वक सुना। इस दौरान उन्हें बताया गया कि साइबर अपराध की शिकायत मिलने पर पुलिस किस प्रकार उसका परीक्षण करती है, संबंधित बैंक एवं अन्य एजेंसियों से समन्वय स्थापित करती है तथा ठगी की धनराशि को रोकने और पीड़ितों को वापस दिलाने के लिए नियमानुसार कार्रवाई करती है। छात्राओं को शिकायतों की जांच, डिजिटल साक्ष्यों के महत्व और साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई। इस अनुभव के माध्यम से उन्होंने पुलिस की जिम्मेदारियों, जनसुनवाई और पीड़ितों की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता के महत्व को करीब से समझा।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों और उनसे बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया गया। उन्हें डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी, फर्जी APK फाइल, अनजान लिंक, OTP साझा करने, बैंकिंग धोखाधड़ी, ATM के सुरक्षित उपयोग और सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से जुड़े जोखिमों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, बैंक खाते की जानकारी, PIN या पासवर्ड साझा नहीं करना चाहिए और न ही किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करना चाहिए अथवा अनजान स्रोत से मोबाइल एप डाउनलोड करना चाहिए। साथ ही जागरूक किया गया कि कोई भी वैधानिक एजेंसी डिजिटल अरेस्ट के नाम पर वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को बंधक बनाकर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव नहीं डालती। साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करने और आधिकारिक वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज कराने की जानकारी भी दी गई।
इसी क्रम में थाना साइबर क्राइम, हाथरस पुलिस ने साइबर ठगी से संबंधित दो मामलों में कुल ₹61,040 की धनराशि पीड़ित पक्षों को वापस कराई। पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता सुरेश को ₹46,000 तथा निर्मला के परिजन को ₹15,040 की धनराशि वापस दिलाई गई। धनराशि वापस मिलने से पीड़ित पक्षों को आर्थिक राहत मिली और उन्होंने हाथरस पुलिस एवं थाना साइबर क्राइम की टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। छात्राओं को यह भी बताया गया कि साइबर ठगी होने पर तत्काल शिकायत दर्ज कराना महत्वपूर्ण है, क्योंकि समय पर सूचना मिलने से ठगी की धनराशि को रोकने और वापस दिलाने की संभावना बढ़ सकती है। मिशन शक्ति फेज-6.0 के अंतर्गत आयोजित यह कार्यक्रम बालिकाओं को आत्मविश्वासी, जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा। एक दिवसीय थानाध्यक्ष बनकर मोनिका एवं रागिनी को पुलिस की कार्यप्रणाली, कानून-व्यवस्था, जनसुनवाई और साइबर अपराधों से निपटने की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला। हाथरस पुलिस द्वारा ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं एवं बालिकाओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा और साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।










