
हाथरस 01 अक्टूबर। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के अलीगढ़ रोड स्थित शांति भवन, आनंदपुरी कॉलोनी केंद्र पर बुजुर्गों के सम्मान में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रातःकालीन राजयोग क्लास के दौरान आयोजित सम्मान समारोह में केंद्र पर मौजूद सभी बुजुर्गों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में प्रेम रघु पैरामेडिकल के निदेशक डॉ. पी.पी. सिंह तथा बीके शांता बहिन और वंदना बहिन ने बुजुर्गों को पीत अंगवस्त्र पहनाकर, आत्म स्मृति का तिलक लगाकर एवं उपहार भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर पंडित ऋषि कुमार कौशिक ने भावपूर्ण संबोधन में कहा कि आज बुजुर्ग प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय जैसे पवित्र स्थान पर सम्मानित हो रहे हैं, जहां बच्चों और युवाओं को संस्कारवान बनाने का कार्य किया जाता है। उन्होंने ब्रह्माकुमारी केंद्र को “बच्चों और युवाओं की पावन संस्कारशाला” बताया। डॉ. पी.पी. सिंह ने कहा कि बुजुर्गों को सम्मानित कर उन्हें खुशी हो रही है। बुजुर्गों का सम्मान करना वास्तव में स्वयं का सम्मान करना है, क्योंकि हमारा अस्तित्व और संस्कार उनसे ही जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के सम्मान की सीख बच्चों को बचपन से ही परिवार में दी जानी चाहिए।
केंद्र संचालिका बीके शांता बहिन ने कहा कि बुजुर्गों का सम्मान केवल एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन होना चाहिए। जिस घर में बुजुर्गों का सम्मान होता है, वहां खुशियों का भंडार रहता है। उन्होंने कहा कि जीवन के इस पड़ाव तक एक दिन प्रत्येक व्यक्ति को पहुंचना है। हम जैसा आचरण करेंगे, बच्चे भी उसी से सीख लेंगे। बुजुर्ग परिवार का आधार होते हैं और घर में एक बुजुर्ग की मौजूदगी भी घर को सूना नहीं होने देती। कार्यक्रम का संचालन कर रहे दिनेश भाई ने कहा कि कई बार बुजुर्गों की बातें हमें उस समय अच्छी नहीं लगतीं, लेकिन जब वे हमारे बीच नहीं रहते तो उनकी कमी बेहद महसूस होती है। उन्होंने कवि वीरेंद्र तरुण की बुजुर्गों पर आधारित कविताएं “आंख जब खुली तो हुआ भोर था” तथा “इस जीवन की रेल चली, अंतिम स्टेशन आएगा” सुनाईं। कविताओं ने कार्यक्रम के माहौल को भावुक बना दिया। इस अवसर पर निरंजन लाल, नानक चंद, रविन्द्र कुमार, यतेन्द्र कुमार आर्य, अरविन्द अग्रवाल, ताराचंद, भीमसेन, राधेश्याम, कमलेश, भगवानदास, मदन लाल शर्मा, रामेश्वर दयाल, जीतू पहलवान, मनोज कुमार, राकेश अग्रवाल, सुभद्रा, गजेन्द्र, लक्ष्मी, वंदना, मोनिका, पूजा बहिन, ओमप्रकाश, राजीव ऋषि, गगन सहित दर्जनों ब्रह्मावत्स उपस्थित रहे।










