हाथरस 09 जून। पुलिस अधीक्षक चिरंजीव नाथ सिन्हा ने आज पुलिस लाइन सभागार में जनपद के सभी थानों पर नियुक्त हेड मोहर्रिरों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर उनके कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में थानों के अभिलेखों के रख-रखाव, अपराध रजिस्टरों के अद्यावधिककरण, मालों के निस्तारण, गिरफ्तारी एवं तलाशी मेमो सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक के दौरान पुलिस अधीक्षक ने कहा कि थानों में रखे जाने वाले सभी महत्वपूर्ण अभिलेखों को समय-समय पर जांचते हुए पूरी तरह अद्यावधिक रखा जाए, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने सभी हेड मोहर्रिरों को निर्देशित किया कि अभिलेखों में प्रविष्टियां स्पष्ट, सटीक एवं समयानुसार की जाएं तथा किसी प्रकार की कमी पाए जाने पर तत्काल सुधार सुनिश्चित किया जाए। पुलिस अधीक्षक ने मालखानों में लंबित मालों की स्थिति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी मालों का नियमानुसार शीघ्र निस्तारण कराया जाए। न्यायालय से संबंधित प्रकरणों में आवश्यक कार्यवाही समयबद्ध रूप से पूरी की जाए तथा मालों के रख-रखाव में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने अनावश्यक रूप से लंबित पड़े मालों के निस्तारण के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। बैठक में अपराध रजिस्टर, गिरफ्तारी अभिलेख, विवेचना संबंधी दस्तावेज एवं अन्य आवश्यक रजिस्टरों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि सभी अभिलेख व्यवस्थित एवं अद्यतन रहें, जिससे किसी भी समय आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा सके।
उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिए कि किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी के समय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पूर्ण पालन किया जाए। प्रत्येक गिरफ्तारी के साथ तलाशी मेमो एवं गिरफ्तारी मेमो अनिवार्य रूप से तैयार किया जाए तथा समस्त कार्यवाही का विधिवत अभिलेखीकरण किया जाए। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि गिरफ्तारी और अन्य पुलिस कार्यवाहियों में पारदर्शिता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। सभी पुलिसकर्मी विधिक प्रावधानों तथा न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करें। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि थानों पर आने वाले प्रत्येक प्रकरण से संबंधित अभिलेखों को गंभीरता एवं सावधानी के साथ सुरक्षित रखा जाए। मुकदमों, विवेचनाओं, गिरफ्तारियों एवं अन्य पुलिस कार्यवाहियों से संबंधित दस्तावेजों का सुव्यवस्थित संरक्षण सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की प्रशासनिक अथवा कानूनी कठिनाई उत्पन्न न हो।


























