हाथरस 14 नवम्बर । आज उत्पन्ना एकादशी का व्रत पूजन है। इस व्रज और पर्व को श्रद्धा और भाव से मनाने का मतलब है कि भगवान त्रिदेव की आराधना करना। यह अंश दत्तात्रेय के रूप में प्रकट हुआ था। इस एकादशी को भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। पूजा करने वाले को सुख, शांति और वैभव्य की प्राप्ति होती है।
उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को किया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विधान है। इस व्रत को रखने वाले दशमी दिथि को शाम को भोजन नहीं करते और व्रत में भी केवल फलों से ही भोग लगाया जाता है। श्रीकृष्ण की पूजा में पुष्प, जल, धूप, अक्षत आदि से पूजन किया जाता है। श्रीकृष्ण की पूजा मात्र से ही ब्रम्हा, विष्णु और शिव की पूजा का श्रेय प्राप्त होता है। यह मोक्ष देने वाला व्रत माना गया है।
व्रत से संबंधित कथाः-
सतयुग में एक बार मुर नामक देत्य हुआ। जिसने देवताओं पर विजय प्राप्त कर इंद्र को इंद्र को अपदस्थ कर दिया। भगवान शिव से गुहार लगाने पर भगवान विष्णु ने मुर से युद्ध किया, लेकिन वह युद्ध से भाग गया तो भगवान विष्णु बद्रिकाश्रम की गुफा में आकर आराम करने लगे। जहां मुर पहुंच गया और विष्णु भगवान पर आक्रमण कर दिया। तभी उनके शरीर से एक कन्या उत्पन्न हुई। जिससे मुर का बध कर दिया। प्रसन्न होकर विष्णु भगवान ने उसको आशीर्वाद दिया। कहा कि तुम्ह ही सभी कल्यणदयनी होगी। तुम्हारी आराधना करने वाला जीवम में प्रसन्न और संपन्न रहेगा। वह कन्या ही एकादशी थी।