रखा मान है भ्रात ने ,
राखी का इतिहास ।
कच्चे धागे में बंधा ,
भैया का विश्वास ।।-1

अक्षत, रोली, राखियां,
दीप, मिठाई, थाल ।
राखी सैनिक से कहे,
रखना माँ का ख्याल ।।-2

भाई-बहिना मन रखें ,
इक दूजे पर गर्व ।
‘दीपक’ प्रेम प्रतीक है ,
रक्षा बंधन पर्व ।।-3

सुना कष्ट जब बहिन पर,
भाई हुआ विभोर ।
कदम मदद को चल पड़े ,
बहिना तेरी ओर ।।-4

मदद मांगने ‘कर्म’ ने ,
भेजा राखी तार ।
मान हुमायूं ने रखा ,
ले रक्षा का भार ।।-5

बचपन से हमको मिला,
रक्षा का अधिकार ।
याद दिलाए हर वर्ष ,
राखी का त्यौहार ।।-6

राखी ऐसा पर्व है ,
जग में नहीं विकल्प ।
कच्चे धागे में बँधा ,
भाई का संकल्प ।।-7

रक्षा बंधन पर्व में ,
आया ऐसा खोट ।
रक्षा के बदले दिए ,
भाई ने कुछ नोट ।।-8

राखी कहती भ्रात से ,
कर ऐसा अनुबंध ।
रक्षा बंधन पर उठा ,
रक्षा की सौगंध ।।-9

बूंदी रानी अमर ने ,
भेजा राखी तार ।
धर्म बहन के हित लड़े,
इज्जत रखी मल्हार ।।-10

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