हाथरस 05 सितम्बर | जिले के टीबी अस्पताल को कोविड अस्पताल बनाए जाने से टीबी के मरीजों का बुरा हाल है। हॉस्पिटल के मैन गेट के सामने खुले आसमान के नीचे तपती धूप में आखिरी सांस गिनते टीबी रोग से ग्रस्त पिता को लेकर बेटी व बेट उसको उपचार, भर्ती करने के लिए इधर उधर भटते देखे गए। वहीं दूसरी ओर सरकारी फरमान के आगे बेबस स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों के पास कोई जबाब नहीं है, वह सिर्फ सरकारी फरमान की दुहाई देकर अपना पीछा छुडाने में लगे हुए हैं। जिससे टीबी मरीज तो मानो अनाथ ही हो गए हैं।
जिला अस्पताल के पीदे ‌जनपद का नामी मटरूमल धन्ना लाल के नाम से टीबी हॉस्पिटल तो है, लेकिन यह हास्पिटल अब केवल नाम का रह गया है। जबकि जिलेभर के टीबी के मरीज काफी लम्बे अर्से से यहां आते हैं, लेकिन कोरोना काल में इस अस्पताल को कोविड अस्पताल बना दिया गया। पूरी तरह से यहां पर कोरोना के मरीजों के भर्ती किए जाने की व्यवस्था की गई है, लेकिन अब यहां पर आने वाले टीबी के रोगियों को दवा या भर्ती की सुविधा नहीं मिल पा रही है। सोमवार को दिल को झकझोर देने वाला मंजर देखने को मिला, थाना हसायान क्षेत्र के गांव सीचावली सानी निवासी वृद्ध हरपाल टीबी रोग से ग्रस्त थे, उनकी हालत बिगड़ने पर परिजन हसायान ले गए, वहां से उसकी हालत अत्यधिक खराब होने के कारण हाथरस रेफर कर दिया गया। मरीज को बेटी कमला देवी और बेटा विश्वेंद्र कुमार 108 एंबुलेंस से हाथरस लेकर आए। वह मरीज को लेकर घंटो घूमते रहे, उसको जिला अस्पताल से टीबी हॉस्पिटल भेज दिया, लेकिन यहां भी उसको भर्ती नहीं किया तो एंबुलेंस वाले ने मरीज को उतार दिया। हार थक कर टीबी हॉस्पिटल के मैन गेट के सामने बने पक्के बैंच पर पिता को रख कर खराब स्वास्थ्य महकमे को कोसते भाई-बहन नजर आए।