लखनऊ 12 फरवरी | उत्तर प्रदेश सरकार ने फैसला किया है कि समरसेबिल लगाने वाले राज्य के सभी लोगों के लिए अब रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। हालांकि घरेलू और किसानों को समरसेबिल लगाने पर कोई शुल्क नहीं देना होगा। केवल रजिस्ट्रेशन कराना होगा, लेकिन औद्योगिक और अन्य उपयोग के लिए शुल्क लगेगा।
सेफ जोन को छोड़कर गैर अधिसूचित क्षेत्र के लिए समरसेविल लगाने के लिए एनओसी लेना जरूरी होगा। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य भूगर्भ जल प्रबंधन एवं नियामक प्राधिकरण गठित होगा। प्राधिकरण औद्योगिक, व्यावसायिक या बल्क में भूजल का उपयोग करने वाली अन्य बड़ी संस्थाओं के लिए शुल्क तय करेगी। इसीलिए यूपी भूगर्भ जल प्रबंधन और नियमन कानून-2019 के प्राविधानों को लागू करने के लिए संबंधित नियमावली-2020 को मंजूरी दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कल हुई कैबिनेट की बैठक में कानून को लागू करने के लिए इससे संबंधित नियमावली को मंजूरी दी गई। जल शक्ति मंत्री डा महेंद्र सिंह ने बताया कि फैसले के अनुसार ड्रिल करने वाली कंपनियों और ठेकेदारों को भी रजिस्ट्रेशन कराना होगा। नियमावली में प्राधिकरण द्वारा भूगर्भ जल के लिए अधिसूचित और गैर अधिसूचित क्षेत्रों की घोषणा करने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि अभी हम जल स्तर ऊंचा करने के लिए उपाय कर रहे हैं, जरूरत पड़ी तो कड़ाई भी करेंगे। इसीलिए कानून को लागू करने जा रहे हैं। सीमा से अधिक जल दोहन करने पर जुर्माना लगाया जाएगा।

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